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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ बाहर रहने की संभावना

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से भारतीय न‍िर्यातकों को बड़ी राहत म‍िली है. ड‍िटेल्‍ड जानकारी डील से जुड़ा ड्रॉफ्ट सामने आने के बाद ही लग पाएगी. अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है क‍ि क‍िन प्रोडक्‍ट पर क‍ितनी कटौती लागू होगी. आपको बता दें डील से जुड़ी यह तस्‍वीर उतनी चमकीली नहीं है, ज‍ितनी इसकी उम्‍मीद की जा रही है. मीड‍िया र‍िपोर्ट के अनुसार भारत से अमेरिका को क‍िये जाने वाले निर्यात का करीब 10 प्रत‍िशत हिस्सा (करीब 8.3 अरब डॉलर का सामान) अभी भी 25 प्रतिशत या इससे ज्‍यादा के टैर‍िफ की मार झेलेगा.

रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत क‍िया

डील के तहत अमेर‍िका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर द‍िया है. लेक‍िन सेक्शन 232 के तहत नेशनल स‍िक्‍योर‍िटी बेस्‍ड टैरिफ को बरकरार रखा जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ पर पोस्ट किया, प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद भारत और अमेर‍िका में ट्रेड डील हो गई है. उन्होंने कहा, ‘मोदी मेरे महान दोस्त हैं. उनके अनुरोध पर अमेरिका तुरंत प्रभाव से भारतीय प्रोडक्‍ट पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25 से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है. भारत भी अमेरिकी प्रोडक्‍ट पर टैरिफ जीरो करने पर काम करेगा.

क्‍यों नहीं हटा सेक्शन 232 वाला टैरिफ?

सेक्शन 232 अमेरिका के 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्‍ट का हिस्सा है. इसके तहत स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटोमोबाइल, कॉपर, लकड़ी और कुछ मशीनर‍ियों पर नेशनल स‍िक्‍योर‍िटी के नाम पर टैरिफ लगाया जाता है. ट्रंप ने इन सभी प्रोडक्‍ट पर पहले 50 प्रतिशत तक ड्यूटी बढ़ाई थी. इस टैरिफ को दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट होने के बावजूद भी नहीं हटाया जाता. नई डील में केवल रेसिप्रोकल टैरिफ कम हुआ है लेक‍िन सेक्शन 232 वाला टैरिफ पहले की ही तरह बरकरार रहेगा.

भारतीय कंपन‍ियों की अमेर‍िकी बाजार पर न‍िर्भरता

साल 2024 के यूएन कॉमट्रेड डेटा के अनुसार भारत की तरफ से अमेरिका को 80 अरब डॉलर का एक्‍सपोर्ट क‍िया गया था. इसमें से 8.3 अरब डॉलर (करीब 10 प्रतिशत) ऐसा सामान था जो सेक्शन 232 के दायरे में आता है. देश की तरफ से क‍िये जाने वाले कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 18.3 प्रतिशत रहा. लेकिन इन प्रोडक्‍ट पर यह बढ़कर 22.7 प्रतिशत हो जाता है. यानी इन सेक्टर में भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर हैं.

सबसे ज्यादा क‍िन सेक्‍टर पर असर?

डील का सबसे ज्‍यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्‍टर पर पड़ेगा, इससे 3.9 अरब डॉलर के न‍िर्यात पर असर पड़ेगा. स्टील का निर्यात ढाई अरब डॉलर और एल्यूमिनियम का न‍िर्यात करीब 80 करोड़ डॉलर का है. तीनों ही कैटेगरी म‍िलाकर प्रभाव‍ित होने वाला न‍िर्यात 85 प्रतिशत से ज्यादा का है. लकड़ी, तांबा और इंडस्ट्रियल व्हीकल जैसे प्रोडक्‍ट का हिस्सा कम है.

इन सेक्टर में अमेर‍िका पर कितनी निर्भरता?

ग्‍लोबल एक्‍सपोर्ट में अमेर‍िका का हिस्सा स्टील में 34 प्रतिशत, एल्यूमिनियम में 37 प्रतिशत और लकड़ी में 39 प्रतिशत तक है. ज्यादा निर्भरता के कारण 25 प्रतिशत टैरिफ भारतीय कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट, कॉम्‍पटीशन और इनवेस्‍टमेंट पर असर डाल सकता है. जानकारों का कहना है क‍ि ट्रेड डील पहला कदम है, लेकिन सेक्शन 232 जैसे टैरिफ बरकरार रहने से भारतीय निर्यातकों को पूरी तरह राहत नहीं म‍िली. खासतौर पर ऑटो, स्टील और एल्यूमिनियम इंडस्ट्री पर दबाव बना रहेगा. फिलहाल, होने वाली डील से नॉर्मल एक्‍सपोर्ट को फायदा हुआ है.

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