
चंपावत जिले के लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार सुबह एक हृदयविदारक सड़क हादसा हो गया। धारचूला से टनकपुर की ओर आ रही टनकपुर डिपो की रोडवेज बस के अचानक ब्रेक फेल हो जाने से यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि चालक की सूझबूझ और साहसिक निर्णय ने बस में सवार सभी यात्रियों की जिंदगी बचा ली, लेकिन इस प्रयास में चालक को अपनी जान गंवानी पड़ी।
गहरी खाई से पहले चालक ने लिया बड़ा फैसला
जानकारी के अनुसार बस मरोड़ाखान-रायकोट क्षेत्र के पास पहुंची थी, तभी उसके ब्रेक अचानक काम करना बंद कर गए। सामने पहाड़ी मार्ग और गहरी खाई होने के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई। बस में कई यात्री सवार थे और किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था।
ऐसे कठिन समय में चालक बेनीराम भट्ट ने अदम्य साहस और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए बस को खाई की ओर जाने से रोकने के लिए सीधे पहाड़ी की तरफ मोड़ दिया। बस के पहाड़ी से टकराने के कारण उसकी रफ्तार नियंत्रित हो गई और बस में बैठे सभी यात्रियों की जान बच गई।
बस बच गई, लेकिन चालक नहीं बच सका
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस के पहाड़ी से टकराते ही चालक की ओर का दरवाजा अचानक खुल गया। जोरदार झटके के कारण चालक बेनीराम भट्ट सीट से बाहर जा गिरे और सड़क किनारे बनी नाली में गिर पड़े।
इसी दौरान अनियंत्रित बस का एक भारी टायर उनके ऊपर चढ़ गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसा इतना भयावह था कि चालक की मौके पर ही मौत हो गई। उनके इस बलिदान ने यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
यात्रियों में मची अफरा-तफरी
दुर्घटना के बाद बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
पुलिस ने मृतक चालक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही घटना की जानकारी परिजनों को दे दी गई है। प्रशासन के अनुसार बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और उन्हें वैकल्पिक वाहनों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने बेनीराम भट्ट
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने चालक बेनीराम भट्ट के साहसिक कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि यदि चालक समय रहते यह निर्णय नहीं लेते तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जनहानि हादसा हो सकता था। उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा ने दर्जनों यात्रियों की जान बचाई, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।



