उत्तराखंडराज्य

देहरादून में बाल श्रम के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एक वर्ष में 40 बच्चों को कराया गया मुक्त

देहरादून। जनपद में बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत जिला प्रशासन ने पिछले एक वर्ष के दौरान व्यापक स्तर पर अभियान चलाते हुए 486 औचक निरीक्षण और छापेमारी की। इस कार्रवाई में विभिन्न प्रतिष्ठानों से 28 बाल श्रमिक और 12 किशोर श्रमिक सहित कुल 40 बच्चों को मुक्त कराकर बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजा गया।

पुनर्वास और शिक्षा पर दिया जा रहा विशेष ध्यान

सहायक श्रम आयुक्त शैलेष सती की अध्यक्षता में आयोजित जिला टास्क फोर्स की बैठक में बताया गया कि मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके।

दोषी नियोक्ताओं से वसूली गई क्षतिपूर्ति राशि

बैठक में जानकारी दी गई कि बाल श्रम कराने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रत्येक मामले में 20-20 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि वसूली गई है। वहीं 12 मामलों में आयु प्रमाण पत्र के आधार पर संबंधित बच्चों के बाल श्रमिक की श्रेणी में नहीं आने के कारण क्षतिपूर्ति की कार्रवाई नहीं की गई। अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

बाल श्रम कानून के उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान

अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। कानून का उल्लंघन करने पर छह माह से दो वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम 20 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और जागरूकता अभियान तेज होंगे

जिला प्रशासन ने पुलिस, श्रम विभाग और संबंधित एजेंसियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सघन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

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