उत्तराखंडराज्य

भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री’ के लिए भारतीय सेना रवाना

देहरादून। भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री’ के 15वें संस्करण में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी सोमवार को थाईलैंड रवाना हो गई। यह अभ्यास 18 से 31 अगस्त तक थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावादी रंगसिट कैंप में आयोजित किया जाएगा। ‘मैत्री’ अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई में आयोजित हुआ था।

दोनों देशों के 85-85 जवान होंगे शामिल

संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना और थाई शाही सेना की 85-85 जवानों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के जवान शामिल हैं। वहीं, थाईलैंड की ओर से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन के सैनिक अभ्यास में भाग लेंगे।

जंगल और अर्ध-शहरी अभियानों पर विशेष जोर

‘मैत्री’ अभ्यास के दौरान कंपनी स्तर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सैन्य संचालन, उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने तथा संयुक्त अभियानों के लिए दोनों सेनाओं की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अभ्यास के तहत क्षेत्रीय प्रशिक्षण, युद्ध संबंधी चर्चाएं, व्याख्यान, सैन्य प्रदर्शन और समापन सत्यापन अभ्यास आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से दोनों देशों के सैनिकों के बीच बेहतर समन्वय और परिचालन क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

आधुनिक तकनीक और उपकरणों का होगा प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान भारतीय और थाई सेनाएं अपने-अपने परिचालन अनुभव साझा करेंगी। इसके साथ ही संयुक्त अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक सैन्य उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इससे दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और सैन्य क्षमताओं को समझने का अवसर मिलेगा।

सैन्य सहयोग को नई मजबूती देगा ‘मैत्री’

भारत और थाईलैंड के बीच वर्ष 2006 में शुरू हुआ ‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता, आपसी समझ और सद्भावना को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है।

संयुक्त प्रशिक्षण और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से ‘मैत्री’ अभ्यास न केवल दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करता है, बल्कि भारत और थाईलैंड के बीच दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों को भी और मजबूती प्रदान करता है।

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