
उत्तराखंड के लोक निर्माण, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित ₹12,000 करोड़ की लागत वाले 210 किमी लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को राज्य के भविष्य के लिए एक “गेमचेंजर” बताया है। उन्होंने इस अभूतपूर्व सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का हृदय से आभार व्यक्त किया। महाराज के अनुसार, प्रधानमंत्री का हालिया दौरा केवल एक आयोजन मात्र नहीं था, बल्कि यह “विकसित उत्तराखंड के दशक” की औपचारिक और भव्य शुरुआत का प्रतीक था।
दूरी ही नहीं, मनोवैज्ञानिक बाधाएं भी हुईं समाप्त
कैबिनेट मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस एक्सप्रेसवे ने केवल भौतिक दूरी को ही कम नहीं किया है, बल्कि दिल्ली और देहरादून के बीच की “मनोवैज्ञानिक दूरी” को भी सदा के लिए समाप्त कर दिया है। अब राजधानी दिल्ली से उत्तराखंड का संपर्क इतना सुगम हो गया है कि इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के पर्यटन, व्यापार, रोजगार और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ेगा। उन्होंने इसे राज्य के लिए “सदी की सबसे बड़ी सौगात” करार दिया।
पर्यटन और रोजगार में क्रांतिकारी उछाल की उम्मीद
यह एक्सप्रेसवे न केवल सुगम चारधाम यात्रा सुनिश्चित करेगा, बल्कि उत्तराखंड में “बारहमासी पर्यटन” (Perennial Tourism) की नींव भी रखेगा। सतपाल महाराज ने अनुमान जताया है कि:
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प्रदेश में प्रतिवर्ष 1 करोड़ अतिरिक्त पर्यटकों का आगमन होगा।
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होटल, होमस्टे और टैक्सी व्यवसाय में 3 गुना तक की वृद्धि दर्ज की जाएगी।
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परिवहन, वेयरहाउसिंग और आतिथ्य सत्कार (Hospitality) के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
पर्यावरण और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम: ग्रीन कॉरिडोर
इस परियोजना की सबसे विशिष्ट विशेषता इसका 12 किमी लंबा एलिवेटेड “ग्रीन कॉरिडोर” है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर माना जा रहा है। यह आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके माध्यम से राजाजी नेशनल पार्क के वन्यजीव, जिनमें हाथी, बाघ और हिरण शामिल हैं, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या सड़क दुर्घटना के भय के अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर सकेंगे।



