
खटीमा में मंगलवार को कुमाऊँ सांस्कृतिक उत्थान मंच द्वारा बीज निगम परिसर में आयोजित उत्तरायणी कौतिक मेले का दीप प्रज्वलित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पर्वतीय विकास भवन का निर्माण किया जाएगा और इस हेतु जिलाधिकारी को भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही उन्होंने मेले को कैलेंडर में शामिल कर आर्थिक सहायता देने और समिति के अनुरोध पर मंच निर्माण की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था और जीवन दर्शन का प्रतीक है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का अवसर है और सूर्य देव को हमारे जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नई शुरुआत का संदेश देने वाला माना जाता है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों, युवाओं और महिलाओं द्वारा पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकगीत और सांस्कृतिक परिधान के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़ने के महत्व को भी रेखांकित किया।
संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन
मुख्यमंत्री ने बताया कि बदलते समय में आधुनिकता के बीच अपनी पहचान और संस्कृति को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र से प्रेरणा लेते हुए देवभूमि उत्तराखंड को विकास का आदर्श मॉडल बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने खटीमा को सिर्फ एक विधानसभा नहीं, बल्कि अपना घर बताते हुए कहा कि यहीं से उनकी जनसेवा की यात्रा शुरू हुई थी।
खटीमा में विकास परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने खटीमा में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया। हाईटेक बस स्टैंड, आधुनिक आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेज, 100 बेड का नया अस्पताल, राष्ट्रीय स्तर का खेल स्टेडियम, गदरपुर और खटीमा बाईपास, नौसर में पुल, सड़क नेटवर्क और सैन्य स्मारक जैसी परियोजनाओं की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त राजकीय महाविद्यालय में एमकॉम और एमएससी की कक्षाएं शुरू करने और जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में एकलव्य विद्यालय का संचालन भी मुख्यमंत्री ने बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा के विकास की गति कभी नहीं रुकेगी। बेरोजगारी दर में एक वर्ष में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कानून व्यवस्था, भूमि और धर्म संबंधी मामलों में उठाए गए कठोर कदमों का भी उल्लेख किया। लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद जैसी घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया और 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया। इसके साथ ही 500 से अधिक अवैध संरचनाओं पर बुलडोजर चलाया गया।
शिक्षा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून और योग्यता आधारित सरकारी नौकरियों का विवरण साझा किया। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रदेश की आर्थिक वृद्धि, बिजली उत्पादन, सड़क लंबाई, मेडिकल कॉलेज और सोलर रूफटॉप परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। डीबीटी और नंदा गौरा योजना के माध्यम से महिलाओं को सीधे लाभ देने पर भी प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं उत्तराखंड की संस्कृति की असली वाहक हैं। उनके संस्कार, मेहनत और त्याग समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। महिला सशक्तिकरण सरकार के लिए संकल्प है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देवभूमि में विकास और संस्कृति दोनों का संरक्षण किया जाएगा और राष्ट्रविरोधी तत्वों को किसी भी हाल में सफलता नहीं मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि
कार्यक्रम में मेयर दीपक बाली, विकास शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष रामेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री उत्तम दत्ता, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, डॉ. प्रेम सिंह राणा, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, वी सी जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. उत्तम सिंह नेगी, सीएमओ डॉ. के. के. अग्रवाल, उप जिलाधिकारी तुषार सैनी, कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति के अध्यक्ष ठाकुर सिंह खाती सहित अन्य अधिकारी और भारी संख्या में मेलार्थी मौजूद थे।



