
देहरादून में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतर्गत “भगवान बिरसा मुंडा नगर” में लगी “रानी अब्बक्का प्रदर्शनी” गुरुवार को आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी। इस भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन पतंजलि योग ट्रस्ट के महासचिव आचार्य बालकृष्ण तथा उत्तराखण्ड के शिक्षा, स्वास्थ्य और सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस वर्ष प्रदर्शनी का मुख्य थीम “देवभूमि से राष्ट्रभूमि तक—उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा एवं विजन 2047 के संदर्भ में राष्ट्रीय पुनर्जागरण” रखा गया है।
अभाविप की संगठनात्मक और सांस्कृतिक यात्रा का विस्तृत प्रदर्शन
प्रदर्शनी में अभाविप की विचार-परंपरा, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय अभियानों, छात्रसंघ चुनावों में उसकी भूमिका तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जुड़े विभिन्न आयामों को विशेष स्थान दिया गया है। स्वतंत्रता संग्राम के महापुरुषों, भारतीय संस्कृति के विविध रूपों और संगठन की विकास यात्रा को अलग-अलग पैनलों, दृश्य-स्थापनों और डॉक्यूमेंटेशन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। देशभर से आए कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, स्कूली छात्रों व अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर गहरी रुचि दिखाई।
रानी अब्बक्का: भारतीय अस्मिता और स्त्री-शौर्य का अद्वितीय प्रतीक
इस प्रदर्शनी का केंद्रीय आकर्षण रहा—रानी अब्बक्का, जिन्हें भारतीय अस्मिता, राष्ट्रनिष्ठा और स्त्री-साहस की अमिट प्रतिमूर्ति के रूप में दर्शाया गया है। उनके शौर्य, संघर्ष और जीवन-आदर्शों को युवाओं तक पहुँचाने हेतु विशेष दृश्य-स्थापन व पैनल लगाए गए, जो आगंतुकों को प्रेरित करते हैं।
उत्तराखण्ड की वीर-गाथाएं और सांस्कृतिक विरासत
प्रदर्शनी में उत्तराखण्ड के वीर नायकों तीलू रौतेली, माधव सिंह भंडारी, और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की गाथाओं को सम्मानीय स्थान दिया गया है। इसके साथ ही राज्य की आध्यात्मिक विरासत, पर्वतीय जीवनशैली, पारंपरिक आभूषण, कृषि-उपकरण और पहाड़ी वास्तुकला की झांकियाँ आगंतुकों को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
नंदा राजजात यात्रा, लोकनृत्य परंपरा, जागर, देवस्थल और पौराणिक स्थलों का प्रभावी प्रदर्शन भी प्रदर्शनी को अत्यंत आकर्षक बनाता है।
महान विभूतियों को समर्पित विविध मंडप
विभिन्न मंडपों में आदिगुरु शंकराचार्य, गौरा देवी, स्वामी रामतीर्थ, गोविंद बल्लभ पंत सहित अनेक देश-सेवा की महान प्रतिमूर्तियों को समर्पित सेक्शन भी शामिल हैं। यह सम्पूर्ण प्रदर्शनी अभाविप की वैचारिक यात्रा, संगठनात्मक योगदान और भारतीय सांस्कृतिक विविधता का एक जीवंत दर्पण प्रस्तुत करती है।
उद्घाटन समारोह में प्रेरक संदेश
मुख्य अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड की पवित्र भूमि पर अभाविप का राष्ट्रीय अधिवेशन होना गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि रानी अब्बक्का प्रदर्शनी उनके तेज, साहस और राष्ट्रनिष्ठा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है तथा अभाविप कार्यकर्ता अपने आचरण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अभाविप के कार्यकर्ता निरंतर राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय रहते हैं और आज कई राज्यों में अभाविप से निकले 8 शिक्षा मंत्री कार्यरत हैं। उन्होंने सभी से इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर इससे प्रेरणा लेने का आग्रह किया।
अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री आदित्य तकियार ने कहा कि देवभूमि की पावन धरा पर शुरू हो रहा यह अधिवेशन इतिहास, संस्कृति और प्रेरणा का संगम सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. आशुतोष मंडावी, संयोजक अमन पंत, प्रांत उपाध्यक्ष प्रगति भरतवाल सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समापन
यह प्रदर्शनी न केवल अभाविप की वैचारिक और संगठनात्मक यात्रा का परिचय कराती है, बल्कि भारतीय संस्कृति, उत्तराखण्ड की परंपराओं और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के विभिन्न आयामों को भी सजीव रूप से प्रस्तुत करती है।



