
नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हर नया शैक्षणिक सत्र केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। देशभर में लाखों बच्चे नई उम्मीदों और सपनों के साथ स्कूलों में कदम रखते हैं, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं।
पहली कक्षा में दो करोड़ बच्चों का प्रवेश
उन्होंने बताया कि इस वर्ष करीब दो करोड़ बच्चों ने पहली कक्षा में दाखिला लिया है। भारत की शिक्षा व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी प्रणालियों में शामिल है, जिसमें 14.7 लाख से अधिक स्कूल, लगभग 25 करोड़ विद्यार्थी और एक करोड़ से ज्यादा शिक्षक सक्रिय हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से शिक्षा में बदलाव
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लागू होने के बाद शिक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन आया है। अब पढ़ाई केवल रटने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिज्ञासा, समझ और समग्र विकास पर आधारित हो गई है। बालवाटिका की शुरुआत से छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार मिल रहा है, जिससे वे पहली कक्षा के लिए बेहतर तैयार हो रहे हैं।
बच्चों के लिए सकारात्मक और सुरक्षित माहौल जरूरी
उन्होंने कहा कि स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए उत्साह और जिज्ञासा से भरा होता है। यदि उन्हें सुरक्षित और सहयोगी वातावरण मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सीखने में अधिक रुचि लेते हैं। खेल, अनुभव और खोज आधारित शिक्षा बच्चों के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
निपुण भारत मिशन से बुनियादी शिक्षा को मजबूती
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बुनियादी साक्षरता और अंकगणित को मजबूत करने के लिए ‘निपुण भारत मिशन’ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य कक्षा दो तक हर बच्चे को समझ के साथ पढ़ने और बुनियादी गणित करने में सक्षम बनाना है।
समग्र विकास पर दिया जा रहा जोर
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों के विकास के लिए कला, खेल और नैतिक मूल्यों को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान
धर्मेंद्र प्रधान ने बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों को ध्यान में रखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य पर फोकस करने की जरूरत बताई। स्कूलों में अनिवार्य शारीरिक शिक्षा, ‘ऑयल बोर्ड’ और ‘शुगर बोर्ड’ जैसे प्रयासों के साथ पीएम-पोषण योजना के जरिए पोषण सुनिश्चित किया जा रहा है।
तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी
उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बढ़ते स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि तकनीक का उपयोग केवल सीखने और विकास के लिए किया जाए।
शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा सुधारों को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक ही नीति और कक्षा के बीच सेतु का काम करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे मातृभाषा को महत्व देते हुए योग्यता आधारित शिक्षा को बढ़ावा दें।
अभिभावकों की भागीदारी भी आवश्यक
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घर बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक होते हैं। बच्चों में पढ़ने की आदत डालना, उनके सवालों का जवाब देना और उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसमें सरकार, शिक्षक, स्कूल और समाज सभी की भागीदारी जरूरी है। यदि सभी मिलकर प्रयास करें, तो हर कक्षा बच्चों के सपनों को साकार करने का मंच बन सकती है और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में आज के विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



