
देहरादून। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को नई और मजबूत दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में जल्द ही सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी, जिससे टैक्सी चालकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
‘भारत टैक्सी’ योजना से मिली प्रेरणा
डॉ. रावत ने बताया कि यह पहल केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ‘भारत टैक्सी’ योजना से प्रेरित है, जिसका शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस योजना के माध्यम से टैक्सी चालकों को केवल चालक नहीं, बल्कि वाहन और सेवा का वास्तविक स्वामी बनाया गया है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके।
कॉर्पोरेट मॉडल से अलग सहकारी सोच
सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस सहकारी मॉडल का उद्देश्य बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह कमीशन आधारित मुनाफा कमाना नहीं है। इसका मूल लक्ष्य सारथियों को उनके श्रम का पूरा प्रतिफल, आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपनी आजीविका चला सकें।
पर्यटन और तीर्थाटन से बढ़ती परिवहन आवश्यकता
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ अब तेजी से पर्यटन, तीर्थाटन और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और शांत वातावरण के कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिवर्ष 30 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड आते हैं, जबकि पिछले वर्ष लगभग 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक राज्य में पहुंचे, जो एक नया रिकॉर्ड है।
प्रधानमंत्री के प्रयासों से पर्यटन को बढ़ावा
सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड के धार्मिक, पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में पर्यटन और तीर्थाटन गतिविधियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे में सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा आर्थिक विकास, सामाजिक संतुलन और रोजगार सृजन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
सारथियों के हित सर्वोपरि
डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित सहकार टैक्सी योजना में सारथी भाई-बहनों के स्वामित्व, सुरक्षा, सामाजिक कवच और सम्मान को केंद्र में रखकर कार्य किया जाएगा। इस योजना को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं और शीघ्र ही एक विस्तृत रोडमैप तैयार कर इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
शहरी से ग्रामीण क्षेत्रों तक मिलेगा लाभ
उन्होंने बताया कि इस योजना में चार पहिया, तीन पहिया और दो पहिया टैक्सी वाहनों को शामिल किया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ पर्वतीय और ग्रामीण इलाकों के स्थानीय युवाओं और चालकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा से न केवल टैक्सी चालकों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि यह योजना उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन, चारधाम यात्रा और वेडिंग डेस्टिनेशन गतिविधियों को सुरक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर सहकारी ढांचे से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।



