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नॉर्वे दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया

ओस्लो में आयोजित ‘भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन’ ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकॉन और वहां के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर भी शामिल हुए। इस मंच से पीएम मोदी ने दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी रोडमैप दुनिया के सामने रखा है।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) की सफलता

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते’ (TEPA) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में आई जबरदस्त तेजी की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख नौकरियों का बड़ा लक्ष्य

पीएम मोदी ने भविष्य का विजन साझा करते हुए दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों को एक बड़ा लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे को TEPA के तहत 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इस निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे भारत में दस लाख (1 मिलियन) नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

भारत की बढ़ती ताकत और निवेश के सुनहरे अवसर

प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत की उन ताकतों को रेखांकित किया जो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। उन्होंने भारत की मजबूत विकास गति, जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend), प्रतिभाशाली युवाओं की फौज और निवेशक-अनुकूल नियामक ढांचे (Investor-Friendly Regulatory Framework) की विशेष रूप से चर्चा की।

इन प्रमुख क्षेत्रों में नॉर्वे को मिला निवेश का न्योता

भारत में मौजूद असीम संभावनाओं को देखते हुए पीएम मोदी ने नॉर्वे की कंपनियों को कुछ खास सेक्टर्स में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया:

  • समुद्री अर्थव्यवस्था (Blue Economy) और जहाज निर्माण

  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और ग्रिड अवसंरचना

  • स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी (Health Tech) और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)

  • स्टार्टअप इकोसिस्टम

हरित भविष्य और जलवायु प्रतिबद्धता पर विशेष बल

भारत आज अपने विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता दे रहा है। पीएम मोदी ने भारत के ‘हरित परिवर्तन’ (Green Transition) पर बात करते हुए देश की बढ़ती ऊर्जा मांग और जलवायु प्रतिबद्धताओं का जिक्र किया। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में भारत के प्रयासों को सामने रखा।

स्वच्छ ऊर्जा में नॉर्वे के वैश्विक नेतृत्व की सराहना

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश, समुद्री डीकार्बोनाइजेशन (Maritime Decarbonization), महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त (Climate Finance) के क्षेत्र में नॉर्वे द्वारा निभाए जा रहे वैश्विक नेतृत्व की खुलकर तारीफ की। उन्होंने दोनों देशों के उद्यमियों से आग्रह किया कि वे उभरते हुए क्षेत्रों की पहचान करें और नई साझेदारियों के जरिए आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाएं।

व्यापारिक जगत का महासंगम और नए समझौते

इस शिखर सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) सहित भारत और नॉर्वे के व्यापार और अनुसंधान समुदायों के 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-ईएफटीए (EFTA) के बीच TEPA समझौता लागू होने के बाद द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में जो तेजी आई है, यह सम्मेलन उसी की एक झलक है। इस दौरान भारतीय और नॉर्वे की कंपनियों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए।

शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण गोलमेज बैठकें

इस मुख्य शिखर सम्मेलन की नींव मजबूत करने के लिए ओस्लो में अलग-अलग स्थानों पर चार विशेष गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन किया गया था। इन सत्रों में मुख्य रूप से भविष्य की तकनीकों और सहयोग पर चर्चा हुई:

  1. स्वास्थ्य सेवा में नवाचार (Healthcare Innovation)

  2. समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation)

  3. बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems)

  4. डिजिटलीकरण, विद्युतीकरण और पवन ऊर्जा (Wind Energy)

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