
देहरादून। भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े सोशल मीडिया तथा कुछ समाचारों में किए जा रहे दावों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शुक्रवार को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।
एनएचएआई ने कहा कि परियोजना में आधुनिक सड़क अवसंरचना के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्राधिकरण ने वृक्षों की कटाई को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है।
वन क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई घटाकर किया गया पर्यावरण संरक्षण
एनएचएआई देहरादून पीआईयू के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने का विशेष ध्यान रखा गया है।
उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में सड़क के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) को 60 मीटर से घटाकर 23 मीटर किया गया है, ताकि अतिरिक्त वन भूमि प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना में एक प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास, छह बॉक्स कल्वर्ट और 13 पाइप कल्वर्ट का निर्माण किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान
परियोजना निदेशक ने बताया कि प्रतिपूरक वनीकरण, वन्यजीव राहत योजना और मिट्टी एवं जल संरक्षण योजनाओं के लिए एनएचएआई की ओर से 6.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई है।
इसके अलावा प्रतिपूरक वनीकरण और अगले 10 वर्षों तक इसके रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की है।
ग्रीन बैरियर और वन्यजीव सुरक्षा उपायों का होगा इस्तेमाल
एनएचएआई के अनुसार परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं।
परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों का वैज्ञानिक तकनीक से प्रत्यारोपण किया जाएगा, जबकि अन्य वृक्षों का प्रबंधन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।
न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन के आरोपों को बताया निराधार
एनएचएआई ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत वृक्षों की कटाई किए जाने के दावे सही नहीं हैं।
सौरभ सिंह ने बताया कि इस मामले में दायर अवमानना याचिका को उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। उन्होंने कहा कि परियोजना का कार्य सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए ही किया जा रहा है।
सतत विकास का उदाहरण बनेगी परियोजना
एनएचएआई ने कहा कि भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना सतत विकास की सोच पर आधारित है।
प्राधिकरण के अनुसार इस परियोजना में आधुनिक सड़क निर्माण के साथ वन संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को समान महत्व दिया गया है।



