NEET री-एग्जाम आज: पहली बार एयरफोर्स ने पहुंचाए पेपर, 22 लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में होंगे शामिल

नई दिल्ली: नीट यूजी परीक्षा हर साल की तरह मई के पहले रविवार यानी 03 मई को हुई थी. लेकिन नीट पेपर लीक के सबूत सामने आने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था. इसके बाद एनटीए प्रमुख और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट यूजी पुनर्परीक्षा का ऐलान किया था. नीट यूजी री-एग्जाम आज यानी 21 जून 2026 को है. नीट पेपर लीक और नकल आदि रोकने के लिए नीट यूजी री-एग्जाम में सिक्योरिटी के अब तक के सबसे बेहतरीन इंतजाम किए गए हैं.
नीट यूजी भारतीय परीक्षा इतिहास का सबसे अनूठा आयोजन बन चुकी है. नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बाद आज देश के 551 और विदेश के 14 शहरों में 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे. अभ्यर्थियों के टूटे भरोसे को दोबारा जोड़ने और व्यवस्था को लीक-प्रूफ बनाने के लिए ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिनकी कल्पना तक किसी भी नेशनल लेवल के एग्जाम में नहीं की गई थी. इस बार का बदलाव सिर्फ ड्रेस कोड या टाइमिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार ने इसे ‘नेशनल सिक्योरिटी मिशन’ की तरह लिया है.
नीट यूजी री-एग्जाम में क्या खास है?
आसमान में गरजते वायुसेना के विमानों से लेकर पटरियों पर दौड़ती स्पेशल ट्रेनों और इंटरनेट पर टेलीग्राम ऐप की पाबंदी तक, इस री-एग्जाम को फुलप्रूफ बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है. जानिए इस साल की नीट परीक्षा में ऐसा क्या अलग है, जो आज से पहले कभी नहीं हुआ.
आसमान से सुरक्षा: पहली बार भारतीय वायुसेना की एंट्री
नीट के इतिहास में पहली बार प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने और समय पर पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद ली गई है. वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टर ने देशभर में 200 से अधिक उड़ानें भरकर प्रश्नपत्रों को पूरी गोपनीयता के साथ देश के 18 रीजनल हब्स और स्ट्रॉन्ग रूम्स तक पहुंचाया. इन गोपनीय पेपर की सुरक्षा में एयरपोर्ट से लेकर ट्रेजरी तक अर्धसैनिक बलों (Paramilitary) के सशस्त्र जवान तैनात रहे, जिसने किसी भी तरह की जमीनी सेंधमारी की गुंजाइश खत्म कर दी.
इतिहास की पहली राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल
NTA ने नीट यूजी परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 20 जून को देश के सभी परीक्षा केंद्रों पर मेगा ‘मॉक ड्रिल’ का आयोजन किया. इसमें 2 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी और परीक्षा अधिकारी शामिल हुए. सुबह 9 बजे से देर शाम तक चली इस ड्रिल का मकसद परीक्षा केंद्रों की जमीनी तैयारी को परखना, भीड़ नियंत्रण का लाइव टेस्ट करना और अलग-अलग प्रशासनिक एजेंसियों के बीच तालमेल को जांचना था. इतिहास में पहली बार किसी प्रवेश परीक्षा के लिए इतने बड़े पैमाने पर प्री-एग्जाम रिहर्सल की गई.
परीक्षार्थियों के लिए ‘स्पेशल ट्रेनें’ और फ्री बसों का तोहफा
नीट यूजी री-एग्जाम के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी से बचाने के लिए रेलवे और राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं. रेलवे ने खास तौर पर नीट परीक्षार्थियों के लिए कई प्रमुख रूटों (रांची-धनबाद, वाराणसी-पटना, झाझा-दानापुर) पर ‘परीक्षा स्पेशल ट्रेनें’ चलाई हैं, जो छात्रों को केंद्र तक ले जाने और परीक्षा के बाद वापस छोड़ने का काम करेंगी. इसके अलावा, उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों में अभ्यर्थियों को राज्य परिवहन की बसों में एडमिट कार्ड दिखाने पर मुफ्त सफर या किराये में भारी छूट की सुविधा दी गई है.
इंटरनेट पर नकेल: टेलीग्राम पर अस्थाई पाबंदी
नीट पेपर लीक की अफवाहों, फर्जी आंसर-की और सोशल मीडिया पर होने वाली धोखाधड़ी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने बेहद सख्त और अप्रत्याशित कदम उठाया. परीक्षा की अवधि के दौरान मैसेजिंग ऐप Telegram के एक्सेस को देश के कई हिस्सों में अस्थाई रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया. इसके साथ ही, NTA ने सटीक अपडेट देने के लिए ऑफिशियल WhatsApp Channel लॉन्च किया, जिससे अभ्यर्थी किसी भी बाहरी दुष्प्रचार का शिकार न हों.
बदली टाइमिंग और रफ वर्क के लिए ज्यादा पेपर्स
इस बार अभ्यर्थियों की सहूलियत और सिक्योरिटी वेरिफिकेशन को बैलेंस करने के लिए परीक्षा का समय 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) कर दिया गया है. अब परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी. अतिरिक्त 15 मिनट बायोमेट्रिक जांच और आधार वेरिफिकेशन के कारण होने वाले समय के नुकसान की भरपाई के लिए दिए गए हैं. इसके साथ ही, फिजिक्स और केमिस्ट्री की लंबी कैलकुलेशन को ध्यान में रखते हुए टेस्ट बुकलेट में रफ वर्क के पेजों की संख्या भी 2 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है.
पेपर सेटर्स को कर दिया लॉक
NTA ने इस बार प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एक्सपर्ट टीम को परीक्षा पूरी होने तक बाहरी दुनिया से आइसोलेट यानी ‘क्वारंटाइन’ करके रखा, जिससे कोई भी अपडेट बाहर न जा सके. परीक्षा केंद्रों को तीन लेयर के सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है, जहां 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए राष्ट्रीय स्तर के कंट्रोल रूम से लाइव एआई मॉनिटरिंग की जा रही है. संदिग्धों और नकल माफियाओं पर नजर रखने के लिए राज्यों की स्पेशल टास्क फोर्स (जैसे UP STF) और साइबर कमांडो को भी बैकएंड पर एक्टिव किया गया है.



