उत्तराखंडराज्य

सरकारी लैबों के निजीकरण के विरोध में मेडिकल लैब तकनीशियन लामबंद: एनएचएम निविदा रोकने की मांग

उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सालयों की प्रयोगशालाओं को पुनः ठेके पर देने की तैयारी के विरोध में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ (NHM) के माध्यम से शुरू की जा रही निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

सरकारी आश्वासन के बावजूद निजीकरण की तैयारी का आरोप

बुधवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशीष चंद्र और प्रदेश महासचिव मयंक राणा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया:

  • सरकार ने पूर्व में सरकारी लैबों के निजीकरण को समाप्त कर सभी जांचों को ‘इन-हाउस’ कराने का आश्वासन दिया था और इसके लिए एक समिति भी गठित की थी।

  • इसके बावजूद, अब पुनः सरकारी प्रयोगशालाओं को निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं।

  • नियमित पदों पर स्थाई नियुक्तियां करने के बजाय ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

135 दिनों से धरना प्रदर्शन जारी, बैठक टालने का आरोप

संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि बेरोजगार डिग्रीधारी मेडिकल लैब तकनीशियन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एकता विहार धरना स्थल पर पिछले 135 दिनों से क्रमिक धरने पर बैठे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शासन स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए बुलाई जाने वाली बैठकों की तारीखें बार-बार स्थगित की जा रही हैं, जिससे अभ्यर्थियों में भारी रोष है।

मेडिकल लैब तकनीशियन संघ की मुख्य मांगें

पत्रकार वार्ता के माध्यम से संघ ने शासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं:

  1. IPHS मानकों के अनुसार पद सृजन: ‘इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स’ (IPHS) के तय मानकों के आधार पर तकनीशियनों के आवश्यक व रिक्त पदों का शीघ्र सृजन किया जाए।

  2. पारदर्शी नियमित भर्ती: वर्षवार मेरिट के आधार पर सेवा नियमावली लागू करते हुए पारदर्शी तरीके से नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू हो।

  3. आयु सीमा में छूट: लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने के कारण कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं या होने की कगार पर हैं; अतः उन्हें एकमुश्त आयु सीमा में छूट प्रदान की जाए।

  4. निजीकरण पर पूर्ण रोक: सरकारी अस्पतालों व लैबों के निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत रोककर केवल स्थाई नियुक्तियां की जाएं।

पत्रकार वार्ता में प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति

इस वार्ता के दौरान संघ के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे, जिनमें रणवीर बिष्ट, अखिलेश भट्ट, कुलभूषण गुसाईं, राजमोहन नेगी, सिद्धार्थ कुकरेती, लोकेंद्र भट्ट, राहुल देव, मुकेश सजवान, शैलेंद्र गौड़, रजत नौटियाल तथा मुसवीर अली मुख्य रूप से शामिल थे।

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