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लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म गोल, जानें EPF और RD में कौन है बेहतर निवेश ऑप्शन

EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि उन नौकरीपेशा लोगों के लिए है जो रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं. इसमें कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों 12% योगदान करते हैं. सरकार हर साल ब्याज दर तय करती है, जो इस साल करीब 8.25% है. यह ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है और पैसा भी पूरी तरह सुरक्षित रहता है.

RD यानी रिकरिंग डिपॉजिट उन लोगों के लिए बढ़िया विकल्प है जो हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर निश्चित रिटर्न चाहते हैं. बैंक या पोस्ट ऑफिस में RD खाता खुलता है और 6 महीने से 10 साल तक चल सकता है. ब्याज दर आमतौर पर 6% से 7.5% के बीच रहती है। यह लचीला विकल्प है लेकिन ब्याज पर टैक्स लगता है.

दोनों स्कीमें सुरक्षित हैं, लेकिन EPF ज्यादा भरोसेमंद है क्योंकि यह एक सरकारी स्कीम है. इसमें ब्याज दर स्थिर रहती है और नुकसान का कोई खतरा नहीं. RD बैंक पर निर्भर होती है, जहां ब्याज दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं. रिटर्न की बात करें तो EPF, RD से बेहतर रिटर्न देता है.

EPF में निवेश करने पर आपको सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है और मैच्योरिटी पर पूरी राशि टैक्स-फ्री होती है. वहीं, RD से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है. निकासी के मामले में RD फ्लेक्सीबल है. आप जल्दी पैसे निकाल सकते हैं, जबकि EPF में निकासी केवल विशेष परिस्थितियों में ही संभव है.

अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति हैं और रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि का फंड बनाना चाहते हैं, तो EPF आपके लिए सही है. वहीं, अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉयड या शॉर्ट-टर्म सेविंग करना चाहते हैं, तो RD एक सुविधाजनक विकल्प है. कुल मिलाकर, EPF लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए बेहतर है, जबकि RD सेफ और आसान सेविंग के लिए उपयुक्त है.

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