
सितारगंज क्षेत्र में खटीमा में रसोई गैस की किल्लत से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद पत्रकार पर दर्ज मुकदमे को लेकर पत्रकारों में भारी रोष देखने को मिला। इस मामले को लेकर पत्रकारों ने एकजुट होकर उपजिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से राज्यपाल को सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भेजा।
निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
पत्रकारों ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था या व्यक्ति को किसी खबर से आपत्ति है, तो उसके लिए कानूनी और वैधानिक विकल्प मौजूद हैं। बिना जांच के सीधे मुकदमा दर्ज करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
गैस वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
वक्ताओं ने खटीमा में गैस की उपलब्धता के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर न मिल पाने और लंबी लाइनों में खड़ा होने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार का कार्य जनता की समस्याओं को उजागर कर प्रशासन तक पहुंचाना है, जिसे गलत तरीके से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का आरोप
पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि जिलाधिकारी द्वारा होम डिलीवरी सुनिश्चित करने और गैस वितरण में लाइन व्यवस्था पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित विभाग और ठेकेदारों द्वारा इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद कार्रवाई करने के बजाय पत्रकार पर मुकदमा दर्ज करना निंदनीय है।
पुलिस से वार्ता के बाद आश्वासन
ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकार कोतवाली पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेंद्र मौनियाल से बातचीत की। इस दौरान यह सहमति बनी कि भविष्य में पत्रकारों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
बड़ी संख्या में पत्रकार रहे मौजूद
इस मौके पर क्षेत्र के अनेक पत्रकार उपस्थित रहे और उन्होंने एकजुटता दिखाते हुए इस कार्रवाई का विरोध किया। सभी ने निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की।



