
देहरादून में नर्सिंग एकता मंच उत्तराखंड के नेतृत्व में चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने अब आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है।
133 दिनों से जारी है धरना
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेशभर के नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले 133 दिनों से एकता विहार धरना स्थल पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। बावजूद इसके, सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में उठाई आवाज
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से अभ्यर्थी लगातार शामिल हो रहे हैं। उन्होंने अपनी मांगों को दोहराते हुए भर्ती प्रक्रिया में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
प्रमुख मांगें क्या हैं
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को पहले की तरह वर्षवार आधार पर संचालित किया जाए। इसके अलावा, आईपीएचएस मानकों के अनुसार राज्य के अस्पतालों में कम से कम 2000 नर्सिंग पदों पर भर्ती सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल सके।
भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों का आरोप
अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का चयन वर्ष 2020-21 तक की वरिष्ठता के आधार पर हो चुका है, जबकि सामान्य वर्ग के वर्ष 2014 के अभ्यर्थी अब तक चयन से वंचित हैं। इसे उन्होंने समानता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
19 अप्रैल से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
मंच के प्रदेश प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अब तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब इसे तेज किया जाएगा। इसी के तहत 19 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई है।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
मंच ने सरकार और संबंधित विभागों से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सीधा प्रभाव डालता है।
आंदोलन में प्रमुख पदाधिकारी शामिल
प्रेस वार्ता में प्रदेश महामंत्री प्रदीप बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता स्तुति सती, जतिन वाधवा, राजेन्द्र कुकरेती और नवल पुडिंर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।



