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भारत-न्यूजीलैंड FTA: भारतीयों को मिला ‘वर्क वीजा’ का बड़ा कोटा, जानें इस ऐतिहासिक समझौते की हर बड़ी बात

नई दिल्ली। आज सोमवार 27 अप्रैल को भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट (India New Zealand Free Trade Agreement) हो गया। दोनों पक्ष वस्तुओं एवं सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर साइन किए हैं। यह समझौता दोनों पक्षों द्वारा सहमत वास्तविक तय तारीख से लागू होगा। एफटीए दो या अधिक देशों के बीच एक आर्थिक व्यवस्था होता है जिसमें वे आपस में व्यापार वाली अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क समाप्त करने या काफी हद तक कम करने पर सहमत होते हैं। इसके साथ ही वे उन बाधाओं को भी कम करते हैं जो दोतरफा व्यापार एवं निवेश को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए की डिटेल

दोनों देशों के बीच बातचीत पहली बार 2010 में शुरू हुई, 2015 में नौ दौर के बाद रुक गई और मार्च 2025 में फिर शुरू हुई। 22 दिसंबर 2025 को वार्ता पूरी होने की घोषणा की गयी। अब 27 अप्रैल 2026 को एफटीए पर हस्ताक्षर होंगे।
इस समझौते में 20 भाग शामिल हैं जिनमें वस्तुओं का व्यापार, मूल नियम, सेवाएं, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुगमता, एसपीएस, टीबीटी, व्यापार उपाय, विवाद निपटान और कानूनी प्रावधान शामिल हैं।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने किया स्वागत

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया है। यह समझौता भारत के माननीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री (HCIM) पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हुआ है। AEPC ने इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है, जो भारत के कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए विकास के नए अवसर खोलेगा।

AEPC के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने कहा, “यह दूरदर्शी समझौता भारत के टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। न्यूजीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से, भारतीय उत्पादों को इमिडिएट प्राइस कॉम्टिटिटवनेस हासिल होगी, विशेष रूप से परिधान और वस्त्र जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में। इससे निर्यात की मात्रा बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और पूरी मूल्य श्रृंखला में MSMEs के विकास को बढ़ावा मिलेगा।”

भारत को क्या होंगे फायदे

भारत के सभी उत्पाद जिनमें श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं, न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क पर निर्यात होंगे। वहां औसत आयात शुल्क केवल 2.3 प्रतिशत है। न्यूजीलैंड ने 15 वर्ष में 20 अरब डॉलर के निवेश (एफडीआई) का वादा किया है।
भारत को आईटी, आईटी-आधारित सर्विसेज, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, निर्माण और अन्य व्यावसायिक सेवाओं सहित कई हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर में अवसर मिले हैं। कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा का नया मार्ग खुलेगा, जिसमें किसी भी समय 5,000 वीजा का कोटा होगा और अधिकतम तीन साल तक रहने की अनुमति होगी।

भारत से वाइन एवं स्पिरिट्स का निर्यात शुल्क-मुक्त होगा जबकि न्यूजीलैंड की वाइन भारत में रियायती शुल्क पर आएगी जिसे 10 वर्ष में धीरे-धीरे कम किया जाएगा।

न्यूजीलैंड को क्या होंगे लाभ?

भारत ने अपने ऑस्ट्रेलिया समझौते के मॉडल पर 70 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों (उत्पाद श्रेणियों) पर बाजार एक्सेस दी है। एफटीए लागू होने के पहले दिन से न्यूजीलैंड के 54.11 प्रतिशत निर्यात पर भारत में शून्य शुल्क मिलेगा। इनमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और वन एवं लकड़ी उत्पाद शामिल हैं।
सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन (दूध एल्ब्यूमिन सहित) जैसे कृषि उत्पादों पर शुल्क में रियायत (लेकिन कोटा एवं न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ) मिलेगी। मसल्स और सैल्मन जैसे समुद्री उत्पादों पर शुल्क सात वर्ष में समाप्त होगा। लोहा, इस्पात और स्क्रैप एल्युमिनियम की कई वस्तुओं पर शुल्क 10 वर्षों या उससे कम समय में समाप्त किया जाएगा। एवोकाडो और पर्सिमन पर आयात शुल्क 10 वर्ष में खत्म किया जाएगा।

संवेदनशील वस्तुओं का क्या होगा?

किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए भारत ने दूध, पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, तांबा और एल्युमिनियम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है।
दुग्ध (दूध, क्रीम, व्हे, दही, पनीर आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर) सब्जियां (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु/वनस्पति/सूक्ष्मजीव वसा व तेल, हथियार व गोला-बारूद, रत्न व आभूषण, तांबा व उससे बने उत्पाद, एल्युमिनियम व उससे बने उत्पाद इसमें शामिल नहीं हैं।

20 अरब डॉलर का निवेश

न्यूजीलैंड ने 15 वर्ष में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीए) लाने का वादा किया है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को लगभग 8.9 करोड़ डॉलर का ही एफडीआई प्राप्त हुआ था। यह समझौता भारत को एक उच्च-आय, नियम-आधारित प्रशांत बाजार तक पहुंच मजबूत करने में मदद करेगा और उसकी हिंद-प्रशांत आर्थिक रणनीति को समर्थन देगा।
न्यूजीलैंड के लिए यह दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक में अधिक सुरक्षित प्रवेश का अवसर देता है। न्यूजीलैंड में तीन लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग (करीब पांच प्रतिशत आबादी) व्यापार और निवेश के लिए मजबूत कड़ी प्रदान करते हैं। आसान वीजा और कम शिक्षा लागत से सेवाओं आदि से व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।

कितना है द्विपक्षीय व्यापार?

दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा (निर्यात 71.1 करोड़ मिलियन डॉलर, आयात 58.71 करोड़ डॉलर)। 2024 में कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर रहा जिसमें सेवाओं का व्यापार 1.24 अरब डॉलर था।
भारत के निर्यात में विमान ईंधन, दवाएं, मोटर वाहन, पेट्रोलियम उत्पाद, रेडीमेड कपड़े और मशीनरी शामिल हैं। आयात में लकड़ी एवं लकड़ी उत्पाद, लोहा-इस्पात, कच्ची ऊन, डेयरी उत्पाद, स्क्रैप धातु, कोयला और कृषि से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

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