अंतर्राष्ट्रीय

PoK में विरोध प्रदर्शनों में 9 लोगों की मौत, BJP और मीरवाइज ने चिंता जताई

इस्लामाबाद। गुलाम कश्मीर (PoK) में लगातार तनाव बढ़ रहा है। मंगलवार को रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की। जिसके बाद शहर के नए बस टर्मिनल के पास झड़प फिर से शुरू हो गई। इन झड़पों के दौरान पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 9 आम नागरिक मारे गए।

मारे गए लोगों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात शामिल थे। वाजिद हयात की मौत रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर हुई। इस ताजा हिंसा ने इलाके में तनाव और बढ़ा दिया है, जहां इस्लामाबाद के खिलाफ नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

PoK की आवाज व्हाइट हाउस तक पहुंची

इस हिंसा से ठीक एक दिन पहले, अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर समुदाय के लोग वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर जमा हुए। उन्होंने इलाके में तेजी से बिगड़ते मानवीय संकट की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की मांग की।

क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग

इस प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और समुदाय के नेताओं समेत लगभग 100 लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिक इलाकों से हट जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे निहत्थे नागरिकों पर घातक बल प्रयोग के आरोपों पर कार्रवाई करें।

भारत से दखल देने की अपील

  • प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से चल रहे इंटरनेट शटडाउन का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा था कि इसके कारण लगभग 40 लाख लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं।
  • स्थानीय लोगों ने एक अनोखी अपील की और भारत से दखल देने को कहा ताकि लोगों की जान बचाई जा सके और मानवीय राहत पहुंचाई जा सके।
  • उन्होंने यह भी मांग की कि प्रभावित निवासियों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए पुंछ और डोडा सेक्टर के जरिए नियंत्रण रेखा (LoC) को खोला जाए।

भारत ने की पाकिस्तान की आलोचना

इस मामले पर मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये झड़पें “व्यवस्थित शोषण” का नतीजा हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoJK में चल रहे विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और उसके अवैध व जबरन कब्जे वाले इलाकों में प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि दुनिया इस स्थिति पर ध्यान देगी और PoK में हो रहे गंभीर अत्याचारों और गलत कामों के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराएगी।

अशांति की यह नई लहर तब शुरू हुई जब पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए पाक-अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में 12 सीटें आरक्षित करने का विरोध किया गया।

अधिकारियों ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दीं और प्रदर्शन के नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की गई है।

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