उत्तर प्रदेशराज्य

देहरादून में कौशल विकास और रोजगार पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

देहरादून स्थित सचिवालय सभागार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कौशल विकास के तहत अब तक हुई प्रगति और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए फॉरवर्ड लिंकेज को मजबूत करने को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण और वास्तविक रोजगार के बीच की खाई को पाटना रहा।

प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार और वेतन न मिलने पर मंथन
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि राज्य में प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद उद्योगों में उन्हें संतोषजनक रोजगार और उचित वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति के कारणों पर गंभीर चर्चा की गई और प्रणालीगत कमियों को चिन्हित किया गया।

आईटीआई और तकनीकी संस्थानों के बावजूद प्लेसमेंट में कमी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों की संख्या बढ़ने के बाद भी प्लेसमेंट और वेतन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। यह प्रबंधन, समन्वय और प्लेटफार्म स्तर पर कमी का संकेत है। उन्होंने संबंधित विभागों को इस दिशा में तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

कुशल श्रमिकों की कमी और बेरोजगार प्रशिक्षित युवाओं का विरोधाभास
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नाई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री और कारपेंटर जैसे दैनिक कार्यों के लिए कुशल श्रमिकों की कमी है, जबकि आईटीआई से प्रशिक्षित अनेक युवा रोजगार की तलाश में हैं। इस विरोधाभास को दूर करने के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, सेवायोजन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।

स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ स्मार्ट मानव संसाधन पर फोकस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ स्मार्ट मानव संसाधन तैयार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए उद्योगों और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षित ट्रेनर-शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों के अपग्रेडेशन के निर्देश दिए गए।

तीन स्तर की वर्कफोर्स मॉडल की योजना
स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने तीन स्तर की वर्कफोर्स—बेसिक स्किल वर्कर, मीडियम तकनीकी वर्कफोर्स और उच्च कुशल तकनीकी वर्कफोर्स—तैयार करने का समेकित मॉडल विकसित करने को कहा। उन्होंने बताया कि यह मॉडल विकसित भारत @2047 की परिकल्पना को साकार करने में सहायक होगा।

ट्रेनिंग के साथ रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जैसे ही किसी युवा का प्रशिक्षण के लिए चयन हो, उसे रोजगार प्रदाता संस्थानों से टैग किया जाए ताकि प्रशिक्षण के साथ ही जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित हो सके। तकनीकी पाठ्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा करने और 6 माह, मध्य अवधि तथा दीर्घकालिक स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।

विदेशी रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
विदेशों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयनित युवाओं को भारत सरकार द्वारा विभिन्न देशों के लिए तय गाइडलाइंस की जानकारी दी जाए, ताकि वे संबंधित देश में बेहतर ढंग से स्वयं को अनुकूलित कर सकें। इसके साथ ही सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायालय में लंबित मामलों के प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए गए, ताकि भर्ती परिणाम अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

उद्योगों की भागीदारी से मांग आधारित कौशल विकास
बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उद्योगों को प्रशिक्षण प्रक्रिया में भागीदार बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सहभागिता से मांग आधारित कौशल विकसित होंगे और युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।

एकीकृत प्लेटफार्म पर काम करने के निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी संबंधित विभागों को एकीकृत प्लेटफार्म पर आकर कौशल विकास और रोजगार से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

भविष्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुतीकरण
सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग सी. रविशंकर ने विभागीय प्रयासों, स्थानीय से लेकर ओवरसीज प्लेसमेंट तक की रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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