लखनऊ में आयोजित उत्तरायणी कौथिग: मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं और साझा की उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत

लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तरायणी, मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और अपनी जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में आयोजित यह कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त मंच है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक पोशाक, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों के माध्यम से न केवल परंपराएं जीवित रहती हैं, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प की जीवंत मिसाल बताया।
पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों का योगदान
मुख्यमंत्री धामी ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था ने उत्तर प्रदेश में रह रहे हजारों उत्तराखंडवासियों को एक सूत्र में बांधकर उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है। रजत जयंती वर्ष में प्रवेश इस समर्पण का प्रमाण है।
अपने भावनात्मक संबंध साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ उनकी कर्मभूमि रही है, जहां से उन्होंने जनसेवा का संकल्प लिया। उत्तरायणी जैसे आयोजनों में लखनऊ आना उनके लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने जैसा है।
विकास और संस्कृति का संतुलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विकास के साथ अपनी संस्कृति और आस्था को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसी परियोजनाएं इसी दृष्टि का परिणाम हैं।
उन्होंने उत्तराखंड सरकार की योजनाओं का भी वर्णन किया:
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केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान
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केदारखंड व मानसखंड मंदिर माला मिशन
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हरिद्वार–ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर
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हरिपुर यमुना कॉरिडोर
इन परियोजनाओं से राज्य की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई भव्यता मिल रही है।
पर्यटन और आर्थिक प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड अब केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं है। नई नीतियों से राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर हब, और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। ‘वेड इन उत्तराखंड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियानों से राज्य की अर्थव्यवस्था को नया बल मिला है।
राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था 26 गुना, प्रतिव्यक्ति आय 17 गुना बढ़कर ₹2.74 लाख हुई है। बजट ₹4,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख करोड़ पार कर चुका है। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 44% रिवर्स पलायन हुआ, जबकि लखपति दीदी योजना से 1.68 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।
सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार देवभूमि की अस्मिता और सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठा रही है।
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अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई
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कड़े भू-कानून
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समान नागरिक संहिता
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नकल विरोधी कानून
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पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
इन सभी उपायों से हजारों युवाओं को रोजगार मिला है और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है।
नया उत्तराखंड: विकास, विश्वास और अवसर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यही नया उत्तराखंड है—जहां विकास, विश्वास और अवसर साथ-साथ हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराया और सभी से सहयोग एवं आशीर्वाद की अपील की।
कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।



