
देहरादून/हैदराबाद। Hyderabad स्थित Kanha Shanti Vanam में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल Gurmit Singh (लेफ्टिनेंट जनरल, से नि) ने प्रतिभाग किया। यह कार्यक्रम श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष, श्री रामचंद्र (बाबूजी) महाराज एवं संत तुकडोजी महाराज की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।
आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक केंद्र बना कान्हा शांति वनम
राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ध्यान साधना के दौरान उन्हें एक अद्भुत शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि यह स्थल केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, जहाँ साधना, सेवा और समर्पण के माध्यम से मानवता के एकत्व का संदेश प्रसारित हो रहा है।
“एक मानवता, एक हृदय” विषय पर दिया प्रेरणादायक संदेश
राज्यपाल ने “एक मानवता, एक हृदयः श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएँ” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। उनका बलिदान यह दर्शाता है कि सच्चा धर्म वही है जो दूसरों के धर्म और अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा होता है।
गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान आज भी प्रासंगिक
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है। जब विश्व असहिष्णुता, हिंसा और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब उनकी शिक्षाएँ शांति, सहिष्णुता और मानवता का मार्ग दिखाती हैं।
युवाओं से ध्यान और सेवा अपनाने का आह्वान
राज्यपाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें ध्यान, आत्मचिंतन और सेवा के मार्ग को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में ध्यान न केवल एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind, तेलंगाना के राज्यपाल Shiv Pratap Shukla, पूज्य कमलेश डी पटेल (दाजी), संतगण, प्रबुद्धजन तथा देश-विदेश से आए साधकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



