उत्तराखंडराज्य

सीमांत भारत को करीब से समझने का अवसर: उत्तरकाशी में ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का भव्य समापन

उत्तरकाशी। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का उत्तरकाशी में उत्साहपूर्ण समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश से आए युवा प्रतिभागियों ने उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्रों, भारत-चीन सीमा से जुड़े गांवों और वाइब्रेंट विलेज परियोजनाओं का भ्रमण कर वहां की संस्कृति, विकास कार्यों और सीमाई जीवन की वास्तविकताओं को नजदीक से समझा।

सीमा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व से कराया गया परिचित

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 12वीं वाहिनी के माटली कैंप में विशेष प्रशिक्षण एवं जानकारी सत्रों में शामिल किया गया। यहां प्रतिभागियों को सीमा सुरक्षा व्यवस्था, सीमांत क्षेत्रों के महत्व और वाइब्रेंट विलेज योजना की रणनीतिक भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कंदारा बुग्याल ट्रैकिंग में दिखाई साहस और क्षमता

युवाओं ने अपनी शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए कंदारा बुग्याल के चुनौतीपूर्ण और दुर्गम ट्रैक को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस गतिविधि ने प्रतिभागियों को पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक परिस्थितियों और टीम भावना के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।

गांवों में पहुंचकर जानी स्थानीय समस्याएं और संभावनाएं

सुखी गांव में प्रतिभागियों ने ग्राम प्रधानों और स्थानीय निवासियों के साथ संवाद स्थापित किया। ग्राम सर्वेक्षण के माध्यम से उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं, आजीविका के साधनों और स्वरोजगार की संभावनाओं का अध्ययन किया। शाम के समय स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने युवाओं को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।

युवा भागीदारी और सरकारी योजनाओं पर हुई चर्चा

झाला गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान युवाओं ने ग्राम प्रधान के साथ विचार-विमर्श किया तथा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस अवसर पर “सरकारी योजनाएं और राजनीति में युवाओं की भूमिका” विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं की भागीदारी और राष्ट्र निर्माण में उनकी जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।

नेलोंग और जादुंग दौरे ने छोड़ी गहरी छाप

कार्यक्रम का सबसे विशेष आकर्षण भारत-चीन सीमा के निकट स्थित ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेलोंग और जादुंग गांवों का भ्रमण रहा। प्रतिभागियों ने आईटीबीपी की नागा बॉर्डर आउटपोस्ट का दौरा किया और देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात जवानों के साथ समय बिताया। युवाओं ने हिमवीरों के साथ भोजन कर उनके साहस और समर्पण को नजदीक से महसूस किया।

सीमा प्रबंधन और सैन्य जीवन की मिली जानकारी

आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने सीमा सुरक्षा, सैन्य रणनीति और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करने की चुनौतियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इसके अतिरिक्त युवाओं ने विश्वप्रसिद्ध गंगोत्री धाम और गंगोत्री गांव का भी भ्रमण किया।

प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

सातवें और अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। सीमांत क्षेत्रों के अध्ययन, अनुशासित सहभागिता और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सभी प्रतिभागी युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

विकसित भारत के विजन से युवाओं को जोड़ने की पहल

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों, सांस्कृतिक विविधता और प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज विजन’ से सीधे जोड़ना था। उनका मानना है कि इस प्रकार के अनुभव युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होंगे।

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