
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में देहरादून जिले के भोपालपानी, बडासी और सोडा सरौली ग्राम पंचायतों का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए आयोजित वित्तीय साक्षरता शिविर की समीक्षा करना और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना था। क्रिसिल (CRISIL) फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘वित्तीय साक्षरता केंद्र’ (CFL) के माध्यम से आयोजित इस शिविर ने क्षेत्र में आर्थिक चेतना का नया संचार किया है।
आर्थिक जागरूकता: समृद्धि और स्थिरता का मार्ग
शिविर को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर ने इस बात पर बल दिया कि एक आर्थिक रूप से जागरूक नागरिक ही सुदृढ़ और आत्मनिर्भर समाज की नींव रखता है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ: उन्होंने नागरिकों को भारत सरकार की विभिन्न पेंशन और बीमा योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
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दीर्घकालिक स्थिरता: वित्तीय साक्षरता को केवल जानकारी नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का अस्त्र बताया।
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वित्तीय समावेशन: उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचें ताकि कोई भी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित न रहे।
स्वयं सहायता समूहों का कौशल और महिला सशक्तीकरण
गवर्नर श्री मल्होत्रा ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए उनकी आर्थिक गतिविधियों का सूक्ष्म अवलोकन किया।
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बैंकिंग सुलभता: शिविर में बिजनेस कोरेस्पोंडेंटों (BC) द्वारा मौके पर ही बुनियादी बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान की गईं।
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प्रदर्शनी और नवाचार: मोबाइल एटीएम वैन, सिक्के बदलने के विशेष काउंटर और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल्स ने इस आयोजन को एक उत्सव का रूप दे दिया।
सामूहिक प्रयास और प्रशासनिक सहभागिता
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केवल आरबीआई ही नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गजों की उपस्थिति ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया।
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प्रमुख उपस्थिति: आरबीआई देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के वरिष्ठ अधिकारी।
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स्थानीय प्रशासन: ब्लॉक विकास अधिकारियों की उपस्थिति ने यह सुनिश्चित किया कि वित्तीय शिक्षा का यह संदेश प्रशासनिक स्तर पर भी मजबूती से आगे बढ़े।



