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ईरान युद्ध का असर: अब 14.2 किलो के बजाय 10 किलो मिलेगा घरेलू गैस सिलेंडर!

खाड़ी देशों में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से आयात में कमी आई है. जिसके चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से कम हो रहा है. इस स्थिति से बचने के लिए सरकार और कंपनियां अपनी कमर कस रही हैं.

ईटी में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि घरेलू गैस सिलेंडर में दी जाने वाली एलपीजी की मात्रा घटाने के बारे में विचार किया जा रहा है. इसमें कहा गया कि 14.2 किलो वाले सिलेंडर में अब करीब 10 किलो गैस दी जाने की योजना पर काम हो रहा है. हालांकि, जब सरकार से इस बारे में सवाल किया गया तो प्रेस ब्रीफिंग के दौरान साफ इनकार कर दिया गया. सरकार की तरफ से कहा गया कि ऐसा कोई विचार नहीं है अफवाहों वहां पर ध्यान ना दें.

गैस आयात पर है दबाव

देश में एलपीजी आयात की बात करें तो इस समय स्थिति दबाव में बनी हुई है, क्योंकि खाड़ी देशों से नए शिपमेंट फिलहाल नहीं पहुंच रहे हैं. पिछले सप्ताह दो जहाजों के जरिए करीब 92,700 टन गैस आई थी. जो देश की केवल एक दिन की खपत के बराबर है.

इसके साथ ही कमर्शियल यूजर्स को सप्लाई फिर से शुरू होने से उपलब्ध स्टॉक पर और दबाव बढ़ गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने भी हाल ही में कई बार संकेत दिया है कि देश में एलपीजी की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है.

कम गैस वाले सिलेंडर की कीमत कैसे तय होगी

अगर सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाने का फैसला लागू होता है, तो उसकी कीमत भी उसी हिसाब से तय की जाएगी. अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सिलेंडर पर अलग स्टिकर लगाया जाएगा. जिससे साफ पता चल सके कि उसमें कम गैस भरी गई है.

इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा और पूरी प्रक्रिया शुरू करने से पहले जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां भी लेनी पड़ेंगी.

कंपनियों ने जताई हैं चिंता

कंपनियों ने इस नए प्लान को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की है. उनका मानना है कि, सिलेंडर का वजन अचानक से कम होने से कंफ्यूजन हो सकती है. लोगों के बीच इसको लेकर विरोध की भावना पैदा होने की संभावना है. साथ ही ऐसे राज्य जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में परेशानी हो सकती है.

कंपनियों के अनुसार, अगर अगले महीने स्थिति और खराब होती है तो, यह गंभीर चिंता का विषय है.

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