
देहरादून जनपद के निजी शिक्षण संस्थानों में एक विशिष्ट प्रकाशक की पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावकों पर बनाए जा रहे अनुचित दबाव को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अभिभावक को विशेष प्रकाशक की सामग्री लेने हेतु विवश नहीं किया जा सकता।
स्काई शाइन पब्लिशर विवाद: जाँच में हुआ बड़ा खुलासा
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जाँच में यह तथ्य सामने आया है कि कई स्कूल ‘Sky Shine Publisher Pvt. Ltd.’ की सामान्य ज्ञान (GK) की पुस्तकों को कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाने का प्रयास कर रहे थे।
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नियमों का उल्लंघन: राज्य परियोजना निदेशक और समग्र शिक्षा उत्तराखंड के स्पष्ट निर्देश थे कि निजी प्रकाशकों की पुस्तकें केवल वैकल्पिक होनी चाहिए।
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दबाव की राजनीति: नियमों के विपरीत, धरातल पर इन पुस्तकों को अनिवार्य बताकर अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार डाला जा रहा था।
तत्काल प्रभाव से आदेश निरस्त: पारदर्शिता की ओर कदम
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कठोर कार्रवाई करते हुए जिला और खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा पूर्व में जारी किए गए उन सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जिनमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निजी प्रकाशक की पुस्तकों का समर्थन किया गया था।
निजी स्कूलों को सख्त हिदायत और आगामी कार्रवाई
प्रशासन ने जनपद के समस्त निजी स्कूलों को ‘कड़ाई से पालन’ करने का निर्देश दिया है। आदेश में साफ कहा गया है कि:
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किसी भी छात्र या अभिभावक पर पुस्तक क्रय करने का मानसिक या आर्थिक दबाव न बनाया जाए।
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शिक्षा विभाग की विशेष टीमें अब स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी।
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केवल पुस्तकों तक ही नहीं, बल्कि अब स्कूलों द्वारा वसूली जा रही फीस के ढांचे की भी गहनता से जाँच की जाएगी।
अभिभावकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
महंगी किताबों और स्कूलों के दबाव से जूझ रहे अभिभावकों के लिए यह आदेश एक संजीवनी की तरह आया है। प्रशासन की इस सक्रियता से शिक्षा के बाजारीकरण पर रोक लगने की उम्मीद जगी है।



