विकास परियोजनाओं और मास्टर प्लान में तेजी लाएं, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को लंबित मास्टर प्लान और विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित आवास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा (Deadline) और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
1. 15 अक्टूबर तक शहरी सौंदर्यीकरण और सड़कों की मरम्मत
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण अभियान चलाने का निर्देश दिया।
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G20 जैसा सौंदर्यीकरण: उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण की गुणवत्ता और स्वरूप G20 समिट के दौरान किए गए कार्यों की तरह आकर्षक और प्रभावी होना चाहिए। इसे 15 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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बजट का बहाना स्वीकार नहीं: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट की कमी को किसी भी विकास कार्य में देरी का कारण नहीं बनाया जा सकता।
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सड़कों का कायाकल्प: विकास प्राधिकरण क्षेत्रों की सभी सड़कों का सर्वे कर अगले 15 दिनों के भीतर खराब सड़कों की मरम्मत करने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
2. अवैध निर्माण पर तकनीक से कड़ा प्रहार: ड्रोन, GIS और डिजिटल डैशबोर्ड
अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
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Monitoring Dashboard: प्रत्येक विकास प्राधिकरण में ‘Illegal Construction Monitoring Dashboard’ विकसित किया जाएगा, जिस पर संदिग्ध निर्माण, निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की रियल-टाइम जानकारी दर्ज होगी।
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सैटेलाइट निगरानी: अवैध निर्माणों पर नजर रखने के लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित तकनीक का उपयोग होगा।
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अधिकारियों पर कार्रवाई: अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
3. ‘सिटी पार्क’ और ‘पिंक टॉयलेट’ का अनिवार्य निर्माण
सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी:
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सभी शहरों में ‘सिटी पार्क’ विकसित किए जाएंगे, जिनमें सामान्य शौचालयों के साथ-साथ ‘पिंक टॉयलेट’ की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
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शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकतानुसार पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे।
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अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का 70% कार्य पूर्ण कर लिया जाए।
4. पार्किंग समस्या का स्थायी समाधान और ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति
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पार्किंग व्यवस्था: देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए MDDA और HRDA को नगर निकायों के साथ समन्वय कर मल्टी-लेवल, सरफेस, पेरीफेरल और PPP मॉडल पर आधारित पार्किंग की कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
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पारदर्शी प्रक्रिया: मानचित्र स्वीकृति (Map Approval System) की प्रक्रिया को सुगम और समयबद्ध बनाने के लिए सभी जिला विकास प्राधिकरणों को ऑनलाइन प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, ताकि नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
5. PM आवास योजना, लैंड पूलिंग और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास
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PM आवास योजना: योजना का लाभ ले चुके SC, ST और BPL परिवारों की विस्तृत सूची 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
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लैंड पूलिंग योजना: किसानों और भूमि स्वामियों के हितों का ध्यान रखते हुए 2 से 3 क्षेत्रों में ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में लैंड पूलिंग का पारदर्शी मॉडल लागू किया जाएगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जनसुविधाएं: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राधिकरणों का दायरा केवल शहरों तक सीमित न रहे। आसपास के ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर स्ट्रीट लाइट, पेयजल और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं।
बैठक में प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति:
इस समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



