व्यापार

सरकार के आदेश के बावजूद ONGC को नहीं मिला ब्लॉक का नियंत्रण, वेदांता पहुंची कोर्ट

नई दिल्ली. देश की दो दिग्गज कंपनियों के बीच लंबे समय से तलवारें खिंची हुई हैं. अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. एक तरफ सरकारी क्षेत्र की महारत्न कंपनी ओएनजीसी है तो दूसरी तरफ उद्योगपति अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited). दरअसल, दोनों कंपनियों के बीच गुजरात के कैम्बे बेसिन में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण तेल और गैस ब्लॉक (CB-OS-02) के मालिकाना हक को लेकर विवाद है. इस ब्लॉक के ऑपरेशनल कंट्रोल को लेकर छिड़ी यह कॉर्पोरेट जंग अब दिल्ली हाई कोर्ट के दरवाजे तक जा पहुंची है. जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

इस बड़े विवाद की शुरुआत तब हुई जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 19 सितंबर, 2025 को एक कड़ा आदेश जारी किया. सरकार ने इस ब्लॉक के प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) की अवधि को आगे बढ़ाने की वेदांता की अर्जी को खारिज कर दिया. सरकार ने ओएनजीसी को तुरंत इस ब्लॉक का टेकओवर करने का आदेश भी थमा दिया. लेकिन, वेदांता अड़ गई और ऑपरेशनल कंट्रोल सरकारी कंपनी को नहीं दिया. इसी वजह से यह मामला एक कानूनी विवाद में बदल गया.

किसके पास है कितनी हिस्सेदारी?

गुजरात के इस विवादित तेल और गैस ब्लॉक में मालिकाना तीन कंपनियों के पास है. ओएनजीसी की हिस्‍सेदारी 50 फीसदी है तो वेदांता ऑपरेटर के रूप में 40 फीसदी हिस्‍सेदारी रखती है. इनवेनियर पेट्रोडाइन लिमिटेड के पास 10% हिस्सेदारी है.

क्‍यों अहम है यह ब्लॉक?

इस ब्लॉक में लक्ष्‍मी और गौरी नाम के दो प्रमुख फील्‍ड्स आते हैं.यहां रोजाना लगभग 3,400 बैरल तेल और 3.4 लाख मानक घन मीटर गैस का उत्पादन होता है. साल 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस 3,314 वर्ग किलोमीटर के ब्लॉक में कुल 13.6 मिलियन बैरल तेल और गैस का भंडार मौजूद है. यह वही ब्लॉक है जिसे अनिल अग्रवाल के ग्रुप ने 2011 में ‘केयर्न इंडिया’ को 8.67 बिलियन डॉलर में खरीदकर हासिल किया था, जिसका बाद में वेदांता में विलय हो गया.

वेदांता के बिजनेस पर क्या पड़ेगा असर?

इस ब्लॉक का पुराना कॉन्ट्रैक्ट 30 जून, 2023 को ही खत्म हो चुका था. हालांकि, अगर अदालत का फैसला वेदांता के पक्ष में नहीं आता है तो भी कंपनी को कोई बहुत बड़ा वित्तीय झटका नहीं लगेगा. कंपनी के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, यह ब्लॉक वेदांता के कुल कामकाजी मुनाफे (EBITDA) में 0.3% से भी कम का योगदान देता है.

क्‍या है वर्तमान स्थिति

सरकारी निर्देश मिलते ही ONGC ने 20 सितंबर, 2025 को ही गुजरात के सुवाली में अपनी ऑपरेशनल टीम तैनात कर दी थी. कंपनी का कहना है कि वे कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन कोर्ट के यथास्थिति के आदेश के कारण फिलहाल रुके हुए हैं. कोर्ट के आदेश की वजह से वेदांता अभी भी ब्लॉक के ऑपरेटर के रूप में काम कर रही है. इस मामले में 18 मई, 2026 को हाई कोर्ट में आखिरी सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button