
काशीपुर। उत्तराखंड भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने हरेला पर्व के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल की है। विभाग ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर के सहयोग से रामनगर के आमपानी बीट गुलजारपुर क्षेत्र में 22 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया। इस क्षेत्र को भविष्य में ‘संजीवनी वन’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस अवसर पर खनन निदेशक राजपाल लेघा और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश आर्य ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
कार्यक्रम में खनन निदेशक राजपाल लेघा ने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य उत्तराखंड में 10 लाख पौधे लगाने का है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत खनन विभाग लगातार खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों में काम कर रहा है। सरल और प्रभावी खनन नीति के कारण इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिला है।
बेहतर खनन नीति से बढ़ा राजस्व
खनन निदेशक ने कहा कि राज्य की बेहतर खनन नीति के चलते उत्तराखंड को 1200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की खनन नीति की सराहना अन्य राज्यों में भी हो रही है और कई राज्य इसका अनुसरण करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खनन विभाग ने उत्तराखंड को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए खनन कारोबार से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी और सहयोग भी जरूरी है।
पौधारोपण के साथ संरक्षण भी जरूरी
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश आर्य ने कहा कि वन विभाग खनन विभाग के साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में हरसंभव सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे।
ऊधमसिंह नगर के खान अधिकारी मनीष परिहार ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना भी जरूरी है। तभी पौधारोपण अभियान का उद्देश्य सफल हो सकेगा।
कई अधिकारी और खनन कारोबारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में वन विभाग की एसडीओ किरण शाह, नैनीताल के खान अधिकारी नवीन सिंह समेत वन विभाग के अधिकारी और खनन व्यवसाय से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।



