
नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित ‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पंचम सत्र ‘धर्मरक्षक धामी’ में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार की नीतियों, अभियानों और विकास उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए समावेशी और पारदर्शी विकास को गति देना है।
देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता सामाजिक समरसता, विधिसम्मत शासन और मूल सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा करना है। इसी क्रम में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। अब तक 10,000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है, जिससे राज्य की संपदा और कानून व्यवस्था को मजबूती मिली है।
शिक्षा सुधार और मदरसों से जुड़े निर्णय
शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 01 जुलाई 2026 के बाद केवल वही मदरसे संचालित होंगे जो राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करेंगे। नियमों और मानकों का उल्लंघन करने वाले 250 से अधिक मदरसों को बंद किया जा चुका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
विशेष गहन पुनरीक्षण और योजनाओं में पारदर्शिता
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका दायरा केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन भी जुड़ा है। आयुष्मान योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर कार्ड का सत्यापन पहले ही शुरू किया जा चुका है।
धर्मरक्षक धामी और विधिसम्मत कार्रवाई
‘धर्मरक्षक धामी’ विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा की गई सभी कार्रवाइयां पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हैं। अब तक लगभग 600 अवैध ढांचों को हटाया गया है। उन्होंने दोहराया कि देवभूमि के मूल स्वरूप और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करना सरकार का संकल्प है।
ऐतिहासिक कानून और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां
आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखण्ड को पहला स्थान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ‘अचीवर्स’ श्रेणी और स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
पर्यटन और अवसंरचना विकास में नई ऊंचाइयां
पर्यटन क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांव को राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है।
प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति
मुख्यमंत्री ने मानसखण्ड कॉरिडोर, चारधाम ऑल वेदर रोड, बदरीनाथ मास्टर प्लान, केदारनाथ और हेमकुण्ड साहिब रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून एलीवेटेड रोड परियोजना लगभग पूर्ण हो चुकी है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा।
समावेशी विकास का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सही नीयत, दृढ़ संकल्प और पारदर्शी शासन से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सकता है। राज्य सरकार इसी सोच और लक्ष्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।



