कांवड़ यात्रा में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुआ ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ अभियान

मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)। एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (एपीआर भारत) ने कांवड़ यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ अभियान की शुरुआत की है। यह विशेष अभियान 15 दिनों तक चलेगा, जिसके तहत जागरूकता वैन मुज़फ्फरनगर और मेरठ में कांवड़ यात्रा मार्ग के चार प्रमुख स्थानों पर लोगों को रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूक करेगी।
35 हजार से अधिक पीईटी बोतलों के संग्रह का लक्ष्य
इस अभियान का उद्देश्य 35 हजार से अधिक पीईटी (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) बोतलों का संग्रह कर उन्हें औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से जोड़ना है। जागरूकता वैन के माध्यम से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को पीईटी बोतलों को अलग से एकत्र करने, उनके वैज्ञानिक तरीके से निपटान और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के महत्व की जानकारी दी जाएगी।
जिम्मेदार उपयोग और निपटान का दिया जा रहा संदेश
एपीआर भारत के डायरेक्टर जनरल गौतम जैन ने कहा कि इस्तेमाल के बाद फेंकी जाने वाली पीईटी बोतलें केवल कचरा नहीं होतीं, बल्कि नई बोतलों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं। उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों तक जिम्मेदार उपयोग और सही तरीके से निपटान का संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक पीईटी बोतलें सर्कुलर अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकें।
रीसाइक्ल्ड प्लास्टिक के सरकारी लक्ष्य को मिलेगा सहयोग
गौतम जैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 तक प्लास्टिक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने और लोगों में रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूकता पैदा करना बेहद आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
एपीआर भारत के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती अनिश्चितता और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए रीसाइक्ल्ड पीईटी (आर-पीईटी) का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और देश की आत्मनिर्भर विनिर्माण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। संगठन ने बताया कि भविष्य में इस अभियान का विस्तार पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों एवं क्षेत्रों में भी किया जाएगा।



