
देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के लिए स्थानांतरण प्रक्रिया को गति देने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिए अतिरिक्त समय देने और स्थानांतरण अधिनियम से आंशिक छूट प्रदान करने का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजने जा रही है। इस संबंध में विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
न्यायालय में लंबित मामलों के कारण प्रभावित हो रही प्रक्रिया
बैठक में शिक्षकों के लंबित स्थानांतरण और पदोन्नति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षा मंत्री ने बताया कि वरिष्ठता और स्थानांतरण से संबंधित कई मामले वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। यही वजह है कि विभाग कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में असमर्थ है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए शासन स्तर पर कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि स्थानांतरण अधिनियम में आवश्यक छूट प्रदान कर धारा-27 और अनुरोध श्रेणी के अंतर्गत रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जा सके।
वरिष्ठता विवाद के कारण रुकी पदोन्नतियां
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में वरिष्ठता से जुड़े विवादों के चलते शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया भी लंबे समय से प्रभावित है। यदि न्यायालय से निर्णय आने में अधिक समय लगता है तो सरकार अंतिम विकल्प के रूप में अध्यादेश लाकर वरिष्ठता निर्धारण और पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार कर सकती है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके, इसके लिए अध्यादेश का प्रारूप पहले से तैयार रखा जाए।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिए गए कई महत्वपूर्ण निर्देश
बैठक के दौरान शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। अधिकारियों को शिक्षकों के त्रिस्तरीय ढांचे के गठन, एससीईआरटी और डायट के नए ढांचे तथा उनकी नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर जर्जर विद्यालय भवनों से संबंधित प्रस्ताव उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। साथ ही प्रदेश के सभी विद्यालयों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए।
अशासकीय विद्यालयों से जुड़े मामलों में भी होगी तेजी
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को अशासकीय विद्यालयों के प्रांतीयकरण से संबंधित मामलों और शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को नियमानुसार जोड़ने की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान कर विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को और अधिक सुचारु बनाया जा सके।



