
देहरादून में विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर प्रतिनियुक्ति या अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की विस्तृत सूची शिक्षा महानिदेशक को उपलब्ध कराएं।
मानव संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम शिक्षा विभाग में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। लंबे समय से अन्य स्थानों पर कार्यरत कार्मिकों की स्थिति का आकलन करना आवश्यक हो गया था।
मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियां
सरकार द्वारा मांगी गई सूची में कर्मचारियों से संबंधित सभी जरूरी विवरण शामिल होंगे। इसमें नाम, पद, मूल तैनाती स्थल, वर्तमान कार्यस्थल, प्रतिनियुक्ति या अटैचमेंट की अवधि और इसके कारण जैसी जानकारियां अनिवार्य रूप से देनी होंगी।
तीन वर्ष से अधिक मामलों की होगी समीक्षा
मंत्री ने कहा कि तीन वर्ष से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति या अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों की विशेष रूप से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में यह व्यवस्था आवश्यक नहीं पाई जाएगी, उन्हें उनके मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजा जाएगा। हालांकि दिव्यांग कार्मिकों और विशेष परिस्थितियों वाले मामलों में राहत दी जा सकती है।
शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की पहल
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाना है। कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की शिकायतें मिल रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं।
छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वापसी से विद्यालयों में शिक्षण कार्य को मजबूती मिलेगी और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। यह कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
मंत्री ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सटीक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या तथ्य छुपाने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
व्यवस्थागत सुधार सरकार की प्राथमिकता
मंत्री ने दोहराया कि शिक्षा विभाग में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पूरे तंत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई जा सके।



