
उत्तराखंड में पलायन की समस्या से निपटने और प्रवासियों को अपने गांवों से जोड़ने के उद्देश्य से पहली बार “प्रवासी पंचायत” की रूपरेखा तैयार की गई है। इस पहल की शुरुआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी, जहां प्रवासियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग द्वारा तैयार इस योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इन पंचायतों में उन लोगों को आमंत्रित किया जाएगा जो रोजगार या अन्य कारणों से राज्य से बाहर रह रहे हैं, लेकिन अपने पैतृक गांव लौटने की इच्छा रखते हैं।
सरकार का उद्देश्य इन पंचायतों के माध्यम से प्रवासियों को स्वरोजगार और स्थानीय अवसरों से जोड़ना है। कोविड काल में लौटे कई लोगों ने कृषि, बागवानी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, होमस्टे, होटल और डेयरी जैसे क्षेत्रों में सफल प्रयास किए हैं। ऐसे अनुभवों को साझा कर अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह पहल शुरू की जा रही है, ताकि पलायन को रोककर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। योजना के तहत नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतें आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।



