
सुल्तानपुर पट्टी (ऊधम सिंह नगर): उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (नैनीताल) के निर्देशों पर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (ऊधम सिंह नगर) के तत्वावधान में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर पट्टी में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती ममता पंत के निर्देशन एवं विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती अनुराधा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में तहसील बाजपुर के पराविधिक कार्यकर्ताओं (PLVs) ने छात्राओं को ‘नालसा डॉन योजना-2025’ और साइबर सुरक्षा के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
क्या है ‘नालसा डॉन स्कीम-2025’?
पराविधिक कार्यकर्ता मोहम्मद शहीद ने योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि:
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यह योजना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा शुरू की गई एक संशोधित और व्यापक पहल है।
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यह वर्ष 2015 की पुरानी योजना (नशा पीड़ितों को विधिक सेवाएं और नशा उन्मूलन योजना) का आधुनिक रूप है, जिसे वर्तमान समय की चुनौतियों जैसे कि सिंथेटिक ड्रग्स और ऑनलाइन नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
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कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता: स्कूलों, कॉलेजों, ब्लॉकों और ग्रामीण स्तर पर नशीली दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक अभियान चलाना।
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मुफ्त कानूनी सहायता: नशा पीड़ितों और उनके परिवारों को निःशुल्क कानूनी परामर्श और सहायता प्रदान करना।
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पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवाएं: पीड़ितों को नशा मुक्ति केंद्रों, चिकित्सीय सेवाओं और मनोवैज्ञानिक परामर्श से जोड़ना।
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कौशल विकास एवं रोजगार: प्रभावित लोगों को कौशल प्रशिक्षण देकर और रोजगार के अवसरों से जोड़कर समाज की मुख्य धारा में वापस लाना।
महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और कानूनी सेवाएं
कार्यक्रम में छात्राओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी दी गई। साथ ही, महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों के प्रति भी जागरूक किया गया:
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नालसा राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर: 15100
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साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर: 1930
साइबर सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड पर सतर्कता
पराविधिक कार्यकर्ता रूना पारुल ने छात्राओं को वर्तमान में बढ़ रहे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने साइबर क्राइम, सोशल मीडिया फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करते हुए सतर्क रहने के उपाय बताए।
कार्यक्रम में उपस्थिति
इस जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में पराविधिक कार्यकर्ता सुनीता, गीता जोशी, शिवानी, अंजली और सिराज अहमद सहित विद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं का विशेष योगदान रहा।



