
देहरादून में बैसाखी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री आवास एक विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इस शुभ अवसर पर सिख समाज के एक प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान सिख परंपरा के अनुरूप मुख्यमंत्री को ‘सरोपा’ भेंट कर सम्मानित किया गया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई इस भेंट में प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
सिख परंपरा के प्रति केंद्र व राज्य सरकार का समर्पण
भेंट के दौरान हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सिख इतिहास के गौरव को पुनर्स्थापित किया गया है। “वीर बाल दिवस” का आयोजन और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर दी गई मान्यता इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान नेतृत्व सिख समाज की धार्मिक आस्थाओं के संरक्षण के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है।
हेमकुंड साहिब रोपवे: दुर्गम राहें अब होंगी आसान
चर्चा के दौरान नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने हेमकुंड साहिब प्रस्तावित रोपवे परियोजना को श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह रोपवे न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए एक सुरक्षित और सुगम माध्यम बनेगा। इसे उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है, जो भविष्य में श्रद्धालुओं के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा।
नानकमत्ता साहिब से मुख्यमंत्री का गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी स्मृतियों के झरोखे खोलते हुए नानकमत्ता साहिब के साथ अपने बचपन के अटूट संबंधों को साझा किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि गुरबाणी की शिक्षाओं ने उन्हें जीवन में सेवा, समर्पण और निस्वार्थ कर्म का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने बैसाखी को केवल एक फसल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, कृषि संपन्नता और सामाजिक एकता का अनुपम प्रतीक बताया।
विकास का नया संकल्प: ‘उत्तराखंड का दशक’ और कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने सिख समाज के राष्ट्र निर्माण में योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया:
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दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: इसे राज्य के विकास का नया प्रवेश द्वार बताया गया है, जो निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगा।
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हेमकुंड रोपवे: आस्था और आधुनिक तकनीक का यह संगम स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
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श्रद्धालु सुरक्षा: यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुगम सड़कों के लिए सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता।
अंत में, मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बैसाखी की यह ऊर्जा उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी और राज्य एकता व परिश्रम के साथ आगे बढ़ता रहेगा।



