उत्तराखंडराज्य

देहरादून में संगीतांजली समिति का भव्य होली मिलन समारोह

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में सोमवार को संगीतांजली शास्त्रीय संगीत समिति की ओर से होली मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। रंग, संगीत और लोकधुनों से सजे इस कार्यक्रम ने श्रोताओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।

शास्त्रीय और लोक संगीत का संगम

कार्यक्रम में आकाशवाणी के टॉप ग्रेड सितार वादक पंडित रॉबिन कर्माकर के नेतृत्व में ग्रेडेड कलाकारों ने होली गीतों और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने गढ़वाली, कुमाऊनी, रूहेलखंडी, ब्रज और राजस्थानी होली गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को पूर्णतः रंगमय बना दिया।

लोकप्रिय होली गीतों की प्रस्तुति

कार्यक्रम का शुभारंभ “जय बोलो गिरिजा नन्दन की” लोकगीत से हुआ। इसके बाद प्रस्तुत किए गए गीतों में शामिल थे:

  • “हर फूलों से मथुरा छाई रही”

  • “आओ बृजराज खेले होली”

  • “खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर”

  • “खोल दे माता खोल भवानी”

  • “मेरो रंगीलो देवर घर ऐ रो छो”

  • “मन मोहन नन्दकिशोर”

  • “झनकारो झनकारो”

  • “होलिया में उड़े रे गुलाल”

इन प्रस्तुतियों पर श्रोता भी झूम उठे और पूरे समारोह में उत्साह की लहर दौड़ गई।

कलाकारों और संगत की समां बांधती प्रस्तुति

इस दौरान रेखा उनियाल, पुष्पा रावत, शिवानी कर्माकर, रेखा रावत, अमृता हालदार, सीमा बिष्ट, नीलम नेगी, लक्ष्मी मंडल, सुनीता बहुगुणा, सरिता कुलाश्री, विजया शर्मा, मीनू नेगी, योगिता पांथरी ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और मधुर बनाया।
संगत में सैकत मंडल, संचारी पुरकायस्थ, आयुष्मान और प्रदीप शर्मा ने संगीत की मधुरता को और निखारा। मंच संचालन शांति बिंजोला और रक्षा बौड़ाई ने किया।

सामाजिक-ऐतिहासिक दृष्टिकोण

कार्यक्रम में सामाजिक इतिहासकार डॉ. योगेश धस्माना ने उत्तराखण्ड की होली के सामाजिक-ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्वतीय होली सामाजिक समरसता और भाईचारे की परंपरा को सदियों से मजबूत करती आई है।

आयोजक और गणमान्य उपस्थित

इस अवसर पर शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. डी.एम. पाण्डे, जे.बी. गोयल, डॉ. लालता प्रसाद सहित संगीतांजली संस्था के पदाधिकारी और शहर के अनेक गणमान्य व्यक्ति तथा युवा पाठक उपस्थित रहे।

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