
सितारगंज। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने ग्राम घुसरी में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तपोषित जनजातीय उप योजना के अंतर्गत सम्पन्न हुआ।

उद्यानिकी और औषधीय पौधों की खेती पर विशेष ध्यान
प्रशिक्षण का मुख्य विषय उद्यानिकी एवं औषधीय पौधों की खेती था, जिसे आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया। इसमें महिलाओं को वैज्ञानिक खेती की विधियां, पौध तैयार करने की तकनीक, रोपण विधि, पोषण प्रबंधन, कीट और रोग नियंत्रण, कटाई के बाद प्रबंधन तथा विपणन संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
मुख्य अतिथि का संदेश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा ने कहा कि औषधीय और उद्यानिकी फसलों की खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का मजबूत साधन बन सकती है। उन्होंने महिलाओं से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण के प्रमुख लाभ
जनजातीय उप योजना के प्रधान अन्वेषक डा. अर्पिता शर्मा कांडपाल ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को औषधीय पौधों की पहचान, उपयोगिता और बाजार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सैद्धांतिक सत्रों के साथ नर्सरी प्रबंधन और जैविक खेती के व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराए गए।
प्रमाण पत्र वितरण
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में भाग लेने के प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिससे महिलाओं में कृषि और उद्यानिकी फसलों के माध्यम से स्वरोजगार को लेकर उत्साह बढ़ा।



