उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी में गन्ने के खेतों में लहलहाएगी तिलहन-दलहन की फसलें, CM योगी ने योजना तैयार करने के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है और प्रदेश की कृषि को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाएगा। लखनऊ में सोमवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन के साथ स्थिर आय का भरोसा देती है।

सीमित भूमि में अधिक उत्पादन पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रति इकाई क्षेत्र अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया और व्यावहारिक मॉडल बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार यह मॉडल किसानों को तीन बड़े लाभ देता है, वो हैं अधिक उत्पादन, अधिक आय और फसल जोखिम से सुरक्षा।

29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र बनेगा आधार

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी क्षेत्र शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस विशाल क्षेत्र में तिलहन और दलहन की इंटरक्रॉपिंग को योजनाबद्ध तरीके से जोड़ा जाए, तो प्रदेश ही नहीं, देश को भी तिलहन-दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

2026 से 2031 तक मिशन मोड में होगी योजना

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू किया जाए। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों की मदद से वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर फसलों का चयन किया जाए। IISR की सिफारिशों का हवाला देते हुए उन्होंने रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उड़द और मूंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

किसानों को मिलेगा तेज नकदी प्रवाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार को प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल लेना इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। इससे किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा, एकल फसल पर निर्भरता घटेगी और प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा भी बढ़ेगी। उन्होंने योजना के लिए स्पष्ट सहायता और अनुदान ढांचा तैयार करने तथा वर्षवार रोडमैप बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के अनुसार यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय बढ़ाएगा और राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में भी अहम योगदान देगा।

व्यापक कृषि परिवर्तन की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह योजना केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य में परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतःफसली खेती प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

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