
रुद्रपुर। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के स्वच्छ, हरित और व्यवस्थित उत्तराखंड के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। नमामि गंगे उत्तराखंड के कार्यक्रम निदेशक श्री विशाल मिश्रा ने विकास भवन सभागार में स्थानीय नगर निकायों और पेयजल निगम के अधिकारियों के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की।
सेप्टिक टैंक प्रबंधन पर सख्त दिशा-निर्देश
बैठक के दौरान श्री मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर निकाय क्षेत्रों में घरों के सेप्टिक टैंकों से निकाले गए सीवर का निस्तारण केवल निर्धारित स्थानों पर ही किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीरता से ली जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से सभी विभागों के बीच समान्वय बनाए रखने और नियमित सेप्टिक मैनेजमेंट कमेटी की बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
घरों में सेप्टिक टैंक अनिवार्य
श्री मिश्रा ने यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि नगर निकाय क्षेत्रों के सभी घरों में सेप्टिक टैंक अनिवार्य रूप से बने हों और किसी भी स्थिति में नालियों में सीवर न डाला जाए। उन्होंने सभी सेप्टिक टैंक वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने के निर्देश दिए और जिन वाहनों में यह सुविधा नहीं है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि सभी नगर निकाय डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण को वार्डवार सेग्रीगेशन के साथ सुनिश्चित करें। इसके अलावा, सूखे कूड़े का स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाए, ताकि कचरा प्रबंधन अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल हो।
गंगा और सहायक नदियों की स्वच्छता: सामूहिक जिम्मेदारी
श्री मिश्रा ने यह भी कहा कि गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। नदियां स्वच्छ रहेंगी तभी शहर स्वच्छ और स्वस्थ रहेंगे। उन्होंने नगर निकायों को निर्देश दिया कि लिक्विड वेस्ट और सॉलिड वेस्ट के निस्तारण के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि नदियों में प्रदूषण रोका जा सके और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता बनी रहे।
बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, सहायक नगर आयुक्त राजू नबियाल, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम सुनील जोशी, सहित सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी उपस्थित थे।



