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क्रेडिट कार्ड की लेट फीस से छुटकारा! RBI के नए नियम से ग्राहकों को मिलेगा फायदा

इमरजेंसी के समय जब फाइनेंशियल हेल्प की जरूरत हो और मदद न मिले, तो आपका क्रेडिट कार्ड बहुत बड़ा सहारा साबित होता है. क्रेडिट कार्ड एक ऐसा कार्ड है, जो आपको पहले खर्च करने की सुविधा देता है. इसका बिल आप महीने के आखिर में पेमेंट करते हैं. कई लोग क्रेडिट कार्ड के बिल को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. वो ड्यू डेट को इग्नोर कर देते हैं और अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी दिन पेमेंट करते हैं. और तो और पूरा बिल पे करने के बजाय मिनिमम अमाउंट ड्यू ही पे करते हैं. हमें लगता है कि इससे कोई दिक्कत नहीं है. अगले महीने पूरा बिल दे दिया जाएगा. लेकिन, क्रेडिट कार्ड का बिल पेमेंट करने में आप जितनी देरी करते हैं. आपको उतना ज्यादा जुर्माना देना पड़ता है. इसके साथ ही आपका सिबिल स्कोर भी गिरता जाता है.

ज्यादातर यूजर्स क्रेडिट कार्ड के लेट फीस से परेशान रहते हैं. लेकिन, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई गाइडलाइंस के तहत अब क्रेडिट कार्ड यूजर्स को बड़ी राहत मिलने जा रही है. नई नियमों के मुताबिक, RBI ने क्रेडिट कार्ड होल्डर्स को पेमेंट के बाद कम से कम 3 दिनों का ग्रेस पीरियड दिया है. इसके अंदर पेमेंट करने पर लेट फीस नहीं लगेगी. इसके अलावा, लेट फीस की रकम बकाया बिल के रेशियो में तय होगी, ताकि ज्यादा चार्ज न देना पड़े.

नया नियम से कार्ड होल्डर को क्या फायदा?

  • नए नियम से बैंक अब लेट फीस चार्ज करने से पहले कार्ड होल्डरों को स्पष्ट सूचना देंगे.
  • इसके तहत फीस में किसी भी बदलाव की जानकारी एक महीने पहले देनी होगी.
  • ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया गया है.
  • कुल मिलाकर इन बदलावों का मकसद क्रेडिट कार्ड होल्डर को गैर-जरूरी चार्जेस और पेनल्टी से बचाना है.

अभी बिल पेमेंट में कितनी देरी पर कितना चार्ज?

आमतौर पर अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल या लोन की किस्त भरने में एक दिन की देरी कर देते हैं, तो आप पर 100 रुपये से 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि, बिल रीपेमेंट में 1 दिन से कम की देरी पर आपका क्रेडिट स्कोर तुरंत नहीं गिरता है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आपकी टाइमिंग और रिस्पॉन्स देखकर स्टेप लेती हैं.

कितने दिन की देरी पर क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है कितना असर?

  • अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का पेमेंट करने में 1 या 2 दिन लेट करते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आमतौर पर ये क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं किया जाता और आपका स्कोर भी नहीं गिरता. बार-बार ऐसा करने से बैंक को आपकी आदत पर शक हो सकता है.
  • अगर आप 7 दिन तक बिल भरना भूल जाते हैं, तो ये भले ही रिपोर्ट न हो;मगर आपके रिकॉर्ड में जरूर दर्ज हो सकता है. खासतौर पर अगर आप बार-बार ऐसा करते हैं, तो बैंक इस पर ध्यान देने लगते हैं.
  • अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में 15-30 दिन की देरी करते हैं, तो सिबिल स्कोर पर असर पड़ना शुरू हो जाता है. 15 दिन की देरी पर 50 से 100 पॉइंट तक क्रेडिट स्कोर गिर सकता है. हालांकि, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री कैसी रही है.
  • अगर आपने 30 दिन तक पेमेंट नहीं किया, तो यह लेट पेमेंट CIBIL जैसी एजेंसियों को रिपोर्ट किया जाता है. इससे आपका स्कोर 90 से 110 पॉइंट तक गिर सकता है.
  • 60 दिन तक बिल न भरने पर बैंक इसे डिफॉल्ट की दिशा में पहला कदम मानते हैं. यहां से आपका स्कोर 130 से 150 पॉइंट तक गिर सकता है. बैंक आप पर भरोसा करने से कतराते हैं.
  • अगर 90 दिन की देरी हो,तो सिवियर डिफॉल्ट माना जाता है. बैंक अब रिकवरी एजेंसी या लीगल नोटिस की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं.
  • अगर 120 दिन से ज्यादा हो जाए, तो आपकी क्रेडिट प्रोफाइल एकदम बिगड़ जाती है. भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.

बार-बार MAD पेमेंट के क्या हैं नुकसान?

अगर आप बार-बार मिनिमम अमाउंट ड्यू से ही पेमेंट कर रहे हैं, तो आप लंबे समय के लिए इंटरेस्ट के जाल में फंस रहे हैं.इससे आपका सिबिल स्कोर खराब होता है. क्योंकि बैंक को लगता है कि आप अपने खर्चे कर्जे पर ही निकालते हैं. बैंक मिनिमम अमाइंट ड्यू पर लेट पेमेंट नहीं लेते, लेकिन जो अमाउंट बचता है उसपर भारी-भरकम ब्याज लिया जाता है. इसमें आप जो अमाउंट भरते हैं उसके बाद बचे हुए अमाउंट पर आपको 3% से 4% तक मंथली इंटरेस्ट एक्स्ट्रा देना होता है. यानी साल भर में 30% से लेकर 45% तक एक्स्ट्रा ब्याज देना होता है.

अगर क्रेडिट कार्ड का बिल EMI में चुकाए तो?

बैंक आपको क्रेडिट कार्ड का बिल EMI बेसिस पर भी चुकाने का मौका देती है.अगर आप क्रेडिट कार्ड के बिल का पेमेंट करने के लिए EMI ऑप्शन चुनते हैं, तो आपको इसके लिए एडिशिनल ब्याज चुकाना होगा. अगर आप 3 महीने की अवधि को चुनते हैं, तो बैंक आपसे सालाना 20% की ब्‍याज दर से चार्ज वसूल सकता है. एक साल की अवधि चुनने पर यह दर 15% हो सकती है.

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