व्यापार

इस साल 16 फीसदी तक बढ़ चुकी है मोबाइल की कीमत

मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च ने मंगलवार को कहा कि भारत में मेमोरी की कॉस्ट बढ़ने के कारण मोबाइल फोन की कीमतें औसतन 16 प्रतिशत बढ़ गई हैं. रुपए की कमजोरी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है. जिसकी वजह से लोकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए इम्पोर्टेड पार्ट्स महंगे हो गए हैं. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन के पूरे मार्केट में गिरावट आने की उम्मीद है, लेकिन चीनी मोबाइल फोन ब्रांड OnePlus इसमें अपवाद है क्योंकि उसने कीमतों में बहुत कम बढ़ोतरी की है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह की रिपोर्ट सामने आई है.

दूसरी छमाही में रिकॉर्ड सेल

रिसर्च फर्म ने कहा कि 2026 की पहली छमाही में भारत में स्मार्टफोन की कीमतें औसतन 16 प्रतिशत बढ़ीं, लेकिन OnePlus ने अपनी कीमतों में केवल 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. मेमोरी की लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ीं, जिससे 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत रिकॉर्ड 318 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई. 10,000 रुपए से कम कीमत वाले फोन की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई, जो औसतन लगभग 32 फीसदी थी, क्योंकि अब इन डिवाइस को बनाने की कॉस्ट में मेमोरी का हिस्सा काफी बढ़ गया है.

2026 की पहली छमाही (H1) में 10,000 रुपए से कम कीमत वाले सेगमेंट में शिपमेंट में साल-दर-साल 65 प्रतिशत की गिरावट आई, और 10,000 रुपए से 15,000 रुपए वाले सेगमेंट में, जो पहले मार्केट के सबसे बड़े सेगमेंट में से एक था, 20 फीसदी की गिरावट आई. 20,000 रुपए से ज्यादा कीमत वाले फोन की सेल्स बढ़ती रही, जिसमें ज्यादा लॉन्च प्राइस, ट्रेड-इन ऑफर और नो-कॉस्ट EMI का योगदान रहा, जिससे महंगे डिवाइस खरीदना आसान हो गया.

OnePlus ने ज्यादा नहीं बढ़ाए दाम

रिसर्च फर्म ने कहा कि AI डेटा सेंटर DRAM और NAND की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं, और रुपए की कमजोरी ने इम्पोर्टेड पार्ट्स को महंगा कर दिया है, जिससे ज्यादातर ब्रांड के पास साल की पहली छमाही में कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई खास विकल्प नहीं बचा. भारत में बिकने वाले लगभग 99 प्रतिशत मोबाइल फोन लोकल स्तर पर बनाए जाते हैं.

फर्म के अनुसार, ज्यादातर ब्रांड ने उन लागतों का एक बड़ा हिस्सा खरीदारों पर डाल दिया, सिवाय OnePlus के, जिसने अलग रास्ता अपनाया. कंपनी ने कहा कि OnePlus की सबसे बड़ी सिंगल प्राइस बढ़ोतरी 12 फीसदी थी, जबकि बाकी इंडस्ट्री में यह 113 फीसदी थी. इसलिए यह अंतर न सिर्फ औसत के मामले में, बल्कि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी के मामलों में भी बना रहा. कीमतों में कम बढ़ोतरी से ग्रोथ पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ा.

काउंटरप्वाइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में 20,000 रुपए से ज्यादा कीमत वाले ऑनलाइन चैनलों पर टॉप पांच ब्रांड्स में OnePlus सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्रांड था. रिसर्च फर्म ने कहा कि इस तिमाही में OnePlus की शिपमेंट में साल-दर-साल 5 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि पूरे मार्केट में डबल-डिजिट की गिरावट की उम्मीद है. OnePlus ने साल की शुरुआत में ही कंपोनेंट्स का स्टॉक जमा कर लिया था और कीमतें तेजी से बढ़ने से पहले ही पुरानी, ​​कम कीमतों पर मेमोरी सुरक्षित कर ली थी.

और क्या कहती है रिपोर्ट

Counterpoint Research के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि इस तरह की कॉस्ट शॉक वाली स्थिति में, ब्रांड्स को आमतौर पर दो विकल्पों में से एक चुनना पड़ता है या तो कीमतें बनाए रखें और मार्जिन कम करें, या फिर मार्जिन बचाए रखें और वॉल्यूम कम करें. OnePlus के H1 के आंकड़े बताते हैं कि वह इस स्थिति से बचने में कामयाब रहा, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि उसने समय रहते कंपोनेंट्स सुरक्षित कर लिए थे और उसका पोर्टफोलियो इतना बड़ा है कि वह दबाव को किसी एक प्राइस बैंड पर डालने के बजाय उसे बांट सकता है. Counterpoint का अनुमान है कि 2028 से पहले मेमोरी की कीमतों में कमी आने की संभावना नहीं है और रुपये की वजह से इंपोर्ट कॉस्ट भी बढ़ रही है, इसलिए कीमतों पर दबाव बने रहने की उम्मीद है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button