उत्तराखंडराज्य

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और पारदर्शिता की मांग को लेकर देहरादून में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

देहरादून: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस ने देहरादून में विशाल प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में नेताओं व कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन से सचिवालय के लिए कूच किया। हालांकि, पुलिस ने सचिवालय से पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जहां कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

दिग्गजों की मौजूदगी में लगा घेराव

इस प्रदर्शन में उत्तराखंड कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने शिरकत की:

  • प्रमुख नेता: प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा।

  • शामिल विधायक: ममता राकेश, फुरकान अहमद, लखपत बुटोला, रवि बहादुर और विक्रम सिंह नेगी समेत कई पूर्व विधायक व पदाधिकारी।

मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR-2026) पर उठाए गंभीर सवाल

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर गंभीर आरोप लगाए:

  • नाम हटाने में धांधली का आरोप: कांग्रेस का दावा है कि उत्तराखंड के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रपत्र-7 (Form-7) दाखिल कर वैध मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से हटाए जा रहे हैं।

  • पारदर्शिता का अभाव: नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया गया। (नोट: निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं।)

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर रखीं ये प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने उपजिलाधिकारी (SDM) सदर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मुख्य मांगें शामिल हैं:

  1. आयुक्तों को हटाना: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों को तत्काल पद से हटाना तथा उनके पूर्व निर्णयों की समीक्षा करना।

  2. स्वतंत्र जांच: निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराना।

  3. प्रपत्र-7 का विवरण सार्वजनिक करना: SIR के दौरान दाखिल सभी ‘प्रपत्र-7’ का विधानसभा व बूथवार ब्योरा सार्वजनिक करना।

  4. आपत्तिकर्ताओं की जांच: बड़े पैमाने पर आपत्तियां दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की जांच करना।

  5. सुनवाई का अवसर: किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना और शिकायतों का समयबद्ध व निष्पक्ष निस्तारण करना।

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