
देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने नीट यूजी (NEET UG) 2025 में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला दिलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
फर्जीवाड़े का खुलासा और पुलिस कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र सिंह डोबाल के अनुसार, 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे।
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दस्तावेजों में गड़बड़ी: जांच में अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए दस्तावेज और पते पूरी तरह फर्जी पाए गए।
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मुकदमा दर्ज: फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर रायपुर थाने में (मुकदमा संख्या 380/26) और क्लेमेंटाउन थाने में (मुकदमा संख्या 86/26) केस दर्ज किए गए।
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SIT का गठन: एसएसपी देहरादून ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) गठित कर जांच शुरू कराई।
45-45 लाख रुपये में सौदेबाजी का पर्दाफाश
जांच और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया:
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सीट का रेट: आरोपियों ने प्रति अभ्यर्थी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से दाखिला दिलाने के नाम पर 45-45 लाख रुपये तय किए थे।
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एडवांस वसूली: तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले लिए गए थे, जबकि शेष राशि दाखिले के बाद दी जानी थी।
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कूटरचित प्रमाणपत्र: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए गए और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
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रूपेश पंडित (30 वर्ष): निवासी पूर्णिया (बिहार), हाल निवासी मेरठ (उत्तर प्रदेश)। यह पिछले 5 सालों से मेरठ में ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंपनी चलाकर कमीशन के आधार पर एडमिशन कंसलटेंसी का काम कर रहा था।
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अरविंद कुमार: निवासी बहादरपुर खादर, लक्सर (हरिद्वार)। इसने अपनी बेटी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था।
आगे की कार्रवाई: एसआईटी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंडों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में गहन जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले अन्य दोषियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

