सेमीकंडक्टर से जुड़ी दुनिया की कई कंपनियों ने भारत में निवेश करने का किया फैसला, बदल जाएगा ‘गेम’

नई दिल्ली: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को बड़ी रफ्तार देते हुए सेमीकॉन इंडिया में 51,666 रजिस्ट्रेशन और करीब 40 हजार लोगों की उपस्थिति दर्ज हुई। दुनिया के 52 देशों से प्रतिनिधि पहुंचे। करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों समेत 600 से ज्यादा एग्जीबिटर्स ने चिप इंडस्ट्री की तकनीक और संभावनाएं पेश की। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह देशों के पवेलियन के साथ 12 राज्यों के पवेलियन भी लगाए गए।
EY और ISBA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2026 के करीब 64 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अवसर रखता है। तीन दिनों में हुए करार और साझेदारियां संकेत देती है कि भारत का लक्ष्य सिर्फ चिप आयात कम करना नहीं, बल्कि डिजाइन से सिस्टम तक वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चैन में बड़ी भूमिका हासिल करना है।
वैल्यू चेन पर जोर
सेमीकॉन इंडिया में 56 एमओयू घोषणाएं और रणनीतिक पहल सामने आईं। इनमें चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग मशीनरी, कच्चे माल, एआई, रिसर्च, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट जैसे सेक्टर शामिल है। यानी भारत अब सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों पर नहीं बल्कि चिप की डिजाइन से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन खड़ी करने पर जोर दे रहा है।
पूरा फोकस सेमीकॉन 2.0 पर
Meity के मुताबिक, पूरा फोकस सेमीफॉन 2.0 पर है। इसका कुल बजट 1.27 लाख करोड़ रुपये है। सेमीकंडक्टर सेक्टर में सबसे बड़ा फायदा युवाओं को रोजगार के रूप में मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन मे स्किलिंग, इंटर्नशिप, हैकाथॉन और उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहा। डिजिटल इंडिया RISC-V ग्रैंड चैलेंज में 1,236 टीमें के 5,045 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।



