
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं का काम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
15 दिन में मुख्य सचिव को देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
मुख्यमंत्री आवास में सोमवार को आयोजित रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन के भीतर मुख्य सचिव को प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह जल्द ही इन परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और कार्यदायी संस्थाओं के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, विभागीय स्वीकृतियों सहित अन्य लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने को कहा।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे की भी समीक्षा
बैठक में केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, नैनीताल, देहरादून-मसूरी, यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी समेत विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित केदारनाथ रोपवे की लंबाई 12.90 किलोमीटर, जबकि हेमकुंड साहिब रोपवे की लंबाई 12.40 किलोमीटर होगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक आसान होगी पहुंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक लोगों की आवाजाही अधिक सुगम होगी। साथ ही, सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
देहरादून-मसूरी रोपवे पर विशेष फोकस
देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष तेजी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन के दौरान मसूरी में यातायात का भारी दबाव रहता है। रोपवे शुरू होने से पर्यटकों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिलेगी और सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
वहीं, नैनीताल रोपवे को पर्यटन और परिवहन व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने इससे जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
हरिद्वार की रोपवे परियोजनाओं पर भी चर्चा
बैठक में हरिद्वार इंटीग्रेटेड रोपवे और त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी रोपवे परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में यात्रियों की सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
17 प्रस्तावित परियोजनाओं की दी गई जानकारी
प्रस्तुतीकरण के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) की प्रथम चरण की 11 और द्वितीय चरण की छह प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की जानकारी दी गई। इसके अलावा उत्तराखंड मेट्रो रेल, शहरी अवस्थापना एवं भवन निर्माण निगम (UKMRC) और पर्यटन विभाग से संबंधित रोपवे परियोजनाओं की स्थिति से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।
9 नवंबर तक कागजों नहीं, धरातल पर दिखे प्रगति
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 9 नवंबर तक परियोजनाओं की प्रगति केवल कागजी कार्रवाई और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि धरातल पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों, जिलाधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण करने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे।


