उत्तराखंडराज्य

धान खरीद नीति को लेकर किसानों का विरोध, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

सितारगंज। अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से मंडी सभागार में किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की धान खरीद नीति को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि वर्ष 2007-08 से अब तक फसल खरीद के नाम पर किसानों का लगातार शोषण हो रहा है।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

कच्चे आढ़तियों के माध्यम से धान खरीद का विरोध

किसानों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की कच्चे आढ़तियों के माध्यम से धान खरीद नीति के चलते प्रदेश के किसानों को हर वर्ष करीब 3 से 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि जब से आढ़तियों के जरिए धान खरीद की व्यवस्था लागू हुई है, तब से उन्हें अपनी उपज का मूल्य एमएसपी से 30 से 40 प्रतिशत तक कम मिल रहा है।

बैठक में किसानों ने मांग की कि धान की खरीद आरएफसी के माध्यम से की जाए और कच्चे आढ़तियों, यूसीएफ सहित अन्य सहकारी केंद्रों के माध्यम से धान खरीद तत्काल बंद की जाए। किसानों ने कहा कि धान खरीद व्यवस्था को वर्ष 2007-08 की तरह दोबारा आरएफसी के माध्यम से संचालित किया जाना चाहिए।

जलाशय भूमि को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग

किसानों ने जलाशय भूमि को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि वर्षों से जलाशयों की भूमि पर रह रहे और खेती कर रहे किसानों को बाबू ग्राम (ऋषिकेश), बग्गा-54 (खटीमा) और बिंदुखत्ता (लालकुआं) की तर्ज पर राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।

बंगाली और सिख समाज से जुड़ी मांगें भी उठीं

बैठक में पूर्वी बंगाल से विस्थापित बंगाली समाज को पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘नमो शूद्र’ का दर्जा देने की मांग की गई। वहीं, सिख समाज को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग भी उठाई गई।

इसके अलावा शक्तिफार्म क्षेत्र में विस्थापित बंगाली समाज के किसानों के निरस्त और लंबित पट्टों को बहाल करने की मांग की गई।

सहकारी चीनी मिल का बोर्ड चुनाव कराने की मांग

किसानों ने द किसान सहकारी चीनी मिल सितारगंज के बोर्ड का चुनाव कराने और मिल का संचालन निर्वाचित बोर्ड को सौंपने की मांग की। किसानों का कहना है कि सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्वाचित बोर्ड के माध्यम से मिल का संचालन किया जाना चाहिए।

गन्ने का भाव 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

बैठक में किसानों ने गन्ने का भाव बढ़ाकर 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की पुरजोर मांग की। किसानों ने कहा कि शुगर कंट्रोल ऑर्डर 1966 की धारा 3 को लागू रखते हुए स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के आधार पर एमएसपी निर्धारित की जाए।

किसानों ने मांग की कि मौजूदा गन्ना पेराई सत्र से ही गन्ने का समर्थन मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर किसानों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो सड़कों पर उतरेंगे किसान

किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर के किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेकर किया जाना चाहिए।

बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला संयोजक जगदेव सिंह, पूर्व दर्जाधारी बलवंत बोहरा, दिनेश सिंह बोहरा, सतवंत सिंह बागी, नारायण सिंह, प्रताप सिंह, पप्पू, मनोज कुमार और सुनील हाल्दार समेत कई किसान मौजूद रहे।

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