यूपी में कार्यकाल खत्म होने पर जिला पंचायत अध्यक्ष ही बनाए जा सकते हैं प्रशासक!, आज समाप्त होगा टेन्योर

लखनऊ. यूपी की योगी सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है. जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बना दिया गया है. यूपी के सभी 75 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाया गया है. जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को खत्म हो रहा था. प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्षो को सौगात मिली है. हालांकि प्रधानों का मामला हाईकोर्ट में अटका हुआ है. UP के इतिहास में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक बनेंगे. 12 जुलाई से नई जिला पंचायतों के गठन तक मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष जिम्मेदारी संभालेंगे. प्रशासक केवल सामान्य (रूटीन) कार्य करेंगे, कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे. विशेष या आपातस्थिति में शासन की अनुमति से ही नीतिगत निर्णय होंगे.
शासन की अनुमति से ही नीतिगत निर्णय
उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत सरकार ने आदेश जारी किया है. पंचायत चुनाव तक जिला पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये फैसला किया गया है. इससे पहले यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की. अदालत ने पंचायत में देरी की वजह से ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को गलत करार दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर हुई सुनवाई करते हुए कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती. हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है. इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.
किसानों को लेकर भी उठाया कदम
किसानों को लेकर भी योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है. अब किसानों को घटिया उर्वरक और कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों की जब्त बैंक गारंटी होगी. गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार सख्त हो गई है. सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. कीटनाशक अधिनियम, 1968 और संबंधित नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. किसानों को अब केवल प्रमाणित कृषि सामग्री मिलेगी.



