
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे के अचानक बाधित होने को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। खराब मौसम के चलते राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर अल्मोड़ा और पौड़ी-गढ़वाल नहीं पहुंच सका, जिसके कारण उन्हें पंतनगर से ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वर्चुअल माध्यम से जनसभा को संबोधित किया।
कार्यकर्ताओं की तैयारियों पर पड़ा असर
हरीश रावत ने बताया कि अल्मोड़ा, पौड़ी और देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने राहुल गांधी के स्वागत और जनसभा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की थीं। हजारों लोग सुबह से ही उनके आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अंतिम समय में मौसम खराब होने की सूचना मिलने से कार्यक्रम बाधित हो गया।
हेलीकॉप्टर उड़ानों को लेकर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जिस समय राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, उसी दौरान राज्य में सरकार द्वारा संचालित अन्य हेलीकॉप्टर सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। उन्होंने दावा किया कि अल्मोड़ा और हल्द्वानी के बीच हेलीकॉप्टर उड़ानें जारी थीं, जबकि राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर उसी मार्ग का उपयोग करने वाला था।
डीजीसीए और यूकाडा से जवाब की मांग
हरीश रावत ने कहा कि जब अन्य हेलीकॉप्टर उसी रूट पर उड़ान भर रहे थे, तो राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर क्यों नहीं उड़ पाया। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका जवाब या तो हेलीकॉप्टर कंपनी को देना चाहिए या फिर डीजीसीए और यूकाडा को। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
सुरक्षा और मौसम को लेकर स्पष्टीकरण
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी की सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है और खराब मौसम में उड़ान न भरने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से उचित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब उसी समय अन्य उड़ानें जारी थीं, तो यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
राजनीतिक बहस को मिला नया मुद्दा
हरीश रावत ने कहा कि देश के नेता प्रतिपक्ष का निर्धारित कार्यक्रम अंतिम समय में रद्द होना एक सामान्य घटना नहीं है। इसलिए संबंधित एजेंसियों को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।
निष्कर्ष
राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे के दौरान मौसम की बाधा के कारण उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ और उन्हें पंतनगर से ही लौटना पड़ा। इस घटना को लेकर अब राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।



