उत्तराखंडराज्य

पिथौरागढ़ में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने लिया 1000 पौधे लगाने का संकल्प

पिथौरागढ़ में विश्व पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको कुमाऊँ द्वारा पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राजकीय इंटर कॉलेज भड़कटिया, दयानंद विद्या मंदिर कासनी के विद्यार्थियों तथा एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया।

बटालियन नर्सरी में मिली व्यावहारिक जानकारी

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों और कैडेट्स को बटालियन नर्सरी की विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया गया। अधिकारियों ने उन्हें हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का महत्व समझाया। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, पौधशाला प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकें तथा पौधों के संरक्षण और देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गईं।

स्थानीय वनस्पति और पर्यावरणीय महत्व पर चर्चा

कार्यक्रम में कुमाऊँ हिमालय क्षेत्र की स्थानीय और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वनस्पति प्रजातियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इससे विद्यार्थियों को क्षेत्रीय जैव विविधता और उसके संरक्षण के महत्व की बेहतर समझ प्राप्त हुई। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रति गहरी रुचि दिखाई।

विद्यार्थियों ने लिया वृक्षारोपण का संकल्प

कार्यक्रम से प्रेरित होकर विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट्स ने अपने जीवनकाल में कम से कम 1000 पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। बटालियन अधिकारियों ने युवाओं को प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा

130 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) ईको कुमाऊँ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विश्व पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और संरक्षण गतिविधियों में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है।

नियमित पौधारोपण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन गतिविधियां

बटालियन द्वारा क्षेत्र में नियमित रूप से पौधारोपण, वन संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जो हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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