उत्तराखंडराज्य

तकनीकी शिक्षा में नया सवेरा: वीर माधोसिंह भंडारी यूनिवर्सिटी में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020’ पर मंथन

देहरादून: उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी गहरी समझ विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय उच्च स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस गौरवमयी बौद्धिक समागम में प्रदेश भर के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए 87 शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और संकाय सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

भव्य शुभारंभ और दीप प्रज्ज्वलन

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिवकुमार शर्मा, महासचिव विवेकानंद पाई, प्रो. हेमवती नंदन और डॉ. मनोज कुमार पांडा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। यह कार्यशाला शिक्षा जगत में नवाचार और पारंपरिक ज्ञान के संगम का प्रतीक रही।

स्थानीय से वैश्विक: कुलपति का विजन

कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने अपने संबोधन में एनईपी-2020 को शिक्षा की दिशा बदलने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

  • रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम: विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों को इस प्रकार पुनर्गठित किया जा रहा है जिससे छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा मिल सके।

  • डिजिटल क्रांति: पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने डिजिटल माध्यमों को शिक्षा के प्रसार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

  • वैश्विक दृष्टिकोण: शिक्षा ऐसी हो जो स्थानीय जड़ों से जुड़ी हो लेकिन उसकी पहुँच वैश्विक स्तर की हो।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का मेल

कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए:

  • भारत-केंद्रित शिक्षा: मुख्य वक्ता डॉ. शिवकुमार शर्मा ने शिक्षा नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन और भारत-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की अनिवार्यता पर बल दिया।

  • विरासत और नवाचार: श्री विवेकानंद पाई ने नालंदा की विरासत और ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (करके सीखना) के महत्व को रेखांकित किया।

  • तकनीकी नवाचार: प्रो. के.के. पंत (निदेशक, IIT रुड़की) ने ‘फ्लिप्ड टीचिंग’ और उद्योगों के साथ जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को स्टार्टअप और एमएसएमई (MSME) के माध्यम से स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया।

सफल समन्वय और समापन

कार्यक्रम का कुशल समन्वय प्रो. के.सी. मिश्रा द्वारा किया गया। तकनीकी सत्रों के उपरांत समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए प्रमाण पत्र वितरित किए गए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार पांडा द्वारा दिया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय, वित्तीय नियंत्रक विक्रम जंतवाल सहित भारी संख्या में संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित रहे।

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